नई दिल्ली : देश के 11 प्रमुख हवाई अड्डों के संचालन, प्रबंधन और विकास को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत देने का रास्ता साफ हो गया है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। 4 अगस्त 2026 को हुई समिति की 149वीं बैठक में यह फैसला लिया गया।
इस प्रक्रिया में अमृतसर, कांगड़ा-गग्गल, वाराणसी, गया, कुशीनगर, भुवनेश्वर, हुबली, रायपुर, औरंगाबाद, तिरुचिरापल्ली और तिरुपति हवाई अड्डों को शामिल किया गया है। इन 11 हवाई अड्डों को पांच समूहों में बांटकर निजी कंपनियों को संचालन का अधिकार देने की तैयारी है।
50 साल की रियायत, कैसे होगी बोली?
प्रस्तावित PPP समझौते की अवधि 50 साल तक हो सकती है। बोली प्रक्रिया में घरेलू यात्रियों की संख्या के आधार पर प्रति यात्री शुल्क को आधार बनाया जा सकता है। सरकार एक कंपनी को सभी समूह मिलने से रोकने के लिए सीमा तय करने पर भी विचार कर रही है। इसका उद्देश्य विमानतळ संचालन को कुछ चुनिंदा कंपनियों तक सीमित होने से रोकना और प्रतिस्पर्धा बनाए रखना है।
अदानी, GMR समेत दिग्गजों की नजर
इस फैसले के बाद देश की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है। अदानी एंटरप्राइजेज देश की प्रमुख निजी एयरपोर्ट ऑपरेटर कंपनियों में शामिल है और इन हवाई अड्डों के लिए आक्रामक बोली लगाने की तैयारी में होने की खबरें हैं। इसके अलावा GMR और VINCI के नाम भी संभावित बोलीदाताओं के तौर पर सामने आए हैं। रिलायंस समेत अन्य बड़ी कंपनियां भी इस प्रक्रिया में दिलचस्पी दिखा सकती हैं।
एयरपोर्ट की सीधी बिक्री नहीं होगी
सरकार के इस कदम का मतलब हवाई अड्डों की सीधी बिक्री नहीं है। इन हवाई अड्डों का मालिकाना हक भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के पास ही रहेगा। निजी कंपनी को केवल तय अवधि के लिए हवाई अड्डे के संचालन, प्रबंधन और विकास का अधिकार दिया जाएगा। अब देखना होगा कि इस बदलाव के बाद यात्रियों को सुविधाओं और सेवाओं में कितना सुधार देखने को मिलता है।


