कश्मीरी पंडितों को फिर धमकी, ऑनलाइन सामने आई कथित ‘हिटलिस्ट’; सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

नाम, फोन नंबर और घर के पते शामिल होने का दावा; प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता

श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाने वाली एक कथित हिटलिस्ट और धमकी पत्र ऑनलाइन सामने आया है। इसमें नाम, फोन नंबर और आवासीय पते जैसी निजी जानकारी शामिल होने का दावा किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इस पत्र की प्रामाणिकता की जांच कर रही हैं और इसे प्रसारित करने वालों का पता लगाने की कोशिश में जुटी हैं।

बताया जा रहा है कि यह धमकी खास तौर पर प्रधानमंत्री पुनर्वास/रोजगार पैकेज के तहत कश्मीर घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को लेकर है। कथित पत्र में कुछ कर्मचारियों के नाम और व्यक्तिगत जानकारी का उल्लेख किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद कर्मचारियों और उनके परिवारों में डर का माहौल है।

ULC के नाम से जारी हुआ कथित पत्र

रिपोर्टों के मुताबिक, यह धमकी पत्र यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) के नाम से सामने आया है। इस संगठन को लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े होने का संदेह बताया जा रहा है। हालांकि, पत्र की वास्तविकता और इसके पीछे मौजूद लोगों की पहचान की आधिकारिक जांच अभी जारी है। कथित धमकी में कश्मीर में वापस लौटकर सरकारी सेवा कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को निशाना बनाने की बात सामने आई है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, जम्मू में रहने वाले परिवारों से जुड़ी जानकारी भी कथित तौर पर पत्र में शामिल है।

1990 की यादों से फिर बढ़ी चिंता

कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए ऐसी धमकियां सिर्फ एक सुरक्षा मामला नहीं, बल्कि पुराने जख्मों को फिर से कुरेदने जैसा है। 1990 के दशक में घाटी में आतंक और धमकियों के कारण बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडित परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा था। ऐसे में आज सामने आई कथित धमकी ने घाटी में काम कर रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले भी धमकी मिलने के बाद प्रशासन ने प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कुछ समय के लिए वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी थी और ट्रांजिट कैंपों की सुरक्षा बढ़ाई गई थी।

कर्मचारियों ने मांगी सुरक्षा

ताजा घटनाक्रम के बाद ऑल पीएम पैकेज एम्प्लॉइज फोरम कश्मीर ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। संगठन ने कर्मचारियों के कार्यस्थलों, आवास और आने-जाने के रास्तों की सुरक्षा की समीक्षा करने की भी मांग की है। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि कथित हिटलिस्ट की सत्यता की जांच जारी है। इसलिए इसमें मौजूद निजी जानकारी को साझा करने के बजाय सुरक्षा एजेंसियों की आधिकारिक जांच और निर्देशों का इंतजार करना जरूरी है।

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