शिलॉन्ग : मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में आसामी नागरिकों और वाहनों पर हुई हिंसा के बाद असम-मेघालय सीमा पर तनाव बढ़ गया है। बुधवार को खासी स्टूडेंट्स यूनियन की रैली के दौरान आसाम के लोगों के साथ मारपीट और वाहनों में तोड़फोड़ व आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इस हिंसा में 31 वाहनों को नुकसान पहुंचा, जिनमें ज्यादातर वाहन असम नंबर के बताए जा रहे हैं। हिंसा के बाद मेघालय के कई इलाकों में भी छिटपुट घटनाएं सामने आईं। मामले का असर अब सड़क परिवहन और दोनों राज्यों के बीच आवाजाही पर भी दिखाई देने लगा है।
शिलॉन्ग में पुलिस चौकी पर पेट्रोल बम
गुरुवार को दिनभर शिलॉन्ग में स्थिति सामान्य रही, लेकिन रात करीब साढ़े नौ बजे नोंगमेंसॉन्ग पुलिस चौकी पर अज्ञात लोगों ने पेट्रोल बम फेंक दिया। बम चौकी के अंदर गिरने से आग लग गई। इसी दौरान शिलॉन्ग में एक स्थान पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाओं में तोड़फोड़ की घटना भी सामने आई। इन घटनाओं के बाद शहर में तनाव और बढ़ गया।
असम में भी विरोध तेज
मेघालय में हुई घटनाओं के विरोध में गुवाहाटी के टैक्सी चालकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर यातायात रोक दिया। इससे दोनों राज्यों के बीच आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। असम के चालक संगठनों और टूरिस्ट टैक्सी चालकों ने मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा और पर्यटन मंत्री से माफी की मांग की है। साथ ही क्षतिग्रस्त वाहनों और घायल लोगों के लिए मुआवजा तथा मेघालय जाने वाले असम नंबर के वाहनों और उनके चालकों की सुरक्षा की लिखित गारंटी मांगी गई है। ‘मांगें पूरी नहीं हुईं तो…’ संगठनों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक मेघालय नंबर के वाहनों को असम में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। वहीं, असम में कुछ लोगों ने छह महीने तक मेघालय को वीकेंड टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर बॉयकॉट करने की अपील भी की है। फिलहाल दोनों राज्यों के बीच बढ़ता तनाव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि हालात जल्द सामान्य कैसे हों और दोनों राज्यों के आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।


