मुंबई : स्कूल में छुट्टी की घंटी बजते ही वड़ा-पाव और समोसा लेने के लिए बच्चों की भीड़ लगना आम बात है। लेकिन अब मुंबई के कई स्कूलों में यह तस्वीर बदलती नजर आ रही है। अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) की सख्ती के बाद स्कूल कैंटीन के मेन्यू में बदलाव किया जा रहा है।
FDA की ओर से स्कूल परिसर और उसके 50 मीटर के दायरे में अधिक कैलोरी वाले और जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देशों को लागू किया जा रहा है। इसके बाद मुंबई के कई स्कूलों ने कैंटीन में मिलने वाले नाश्ते के विकल्प बदलने शुरू कर दिए हैं। अब वड़ा-पाव, समोसा और एरेटेड ड्रिंक्स की जगह इडली, डोसा, पोहा, उपमा, शीरा और छाछ जैसे खाद्य पदार्थ विद्यार्थियों को दिए जा रहे हैं। यानी बच्चों के पसंदीदा जंक फूड की जगह अब पौष्टिक और पारंपरिक नाश्ते को प्राथमिकता दी जा रही है।
नियम तोड़ने पर स्कूल प्रशासन की भी जिम्मेदारी
स्कूल परिसर या उसके 50 मीटर के दायरे में नियमों के खिलाफ खाद्य पदार्थों की बिक्री होने पर इसकी जानकारी खाद्य सुरक्षा विभाग को देना स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अभिभावकों को भी सलाह
सिर्फ कैंटीन का मेन्यू बदलने से बच्चों की खान-पान की आदतें नहीं बदलेंगी। इसलिए स्कूल प्रशासन की ओर से अभिभावकों से भी बच्चों के टिफिन में जूस, तले हुए खाद्य पदार्थ और जंक फूड देने से बचने की अपील की जा रही है। इसके बजाय बच्चों को घर का ताजा, पौष्टिक और संतुलित भोजन देने की सलाह दी गई है। आखिरकार बच्चों की छोटी उम्र में बनने वाली खान-पान की आदतें ही आगे चलकर उनके स्वास्थ्य पर बड़ा असर डालती हैं।


