मुंबई : युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने अब रोकथाम पर जोर देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य के हर स्कूल और कॉलेज का परिसर टपरीमुक्त और नशामुक्त होना चाहिए। इस मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाए।
‘नशामुक्त महाराष्ट्र’ नीति को लेकर हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के नशे की लत में फंसने के बाद इलाज करने से ज्यादा जरूरी है कि उन्हें नशे की ओर धकेलने वाली गतिविधियों पर ही रोक लगाई जाए। उन्होंने प्राचार्यों और मुख्याध्यापकों को अपने-अपने संस्थानों के परिसर को नशामुक्त घोषित करने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।
पाठ्यक्रम में शामिल होंगे नशे के दुष्परिणाम
सरकार की ओर से विद्यार्थियों को नशे के गंभीर परिणामों के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए अमली पदार्थों के दुष्परिणामों को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे कम उम्र में ही विद्यार्थियों को नशे के खतरों की जानकारी मिल सकेगी।
ड्रग्स मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट पर जोर
अमली पदार्थों से जुड़े अपराधों में एनडीपीएस कानून का प्रभावी इस्तेमाल करने के साथ ही मामलों का जल्द निपटारा करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिए। सरकार का उद्देश्य नशे के कारोबार पर कार्रवाई के साथ-साथ दोषियों को जल्द सजा दिलाना है।
हर सरकारी अस्पताल में नशामुक्ति केंद्र
नशे के जाल में फंस चुके युवाओं को दोबारा सामान्य जीवन में लाने के लिए राज्य के प्रत्येक सरकारी अस्पताल में नशामुक्ति केंद्र शुरू करने की योजना पर भी जोर दिया गया है। इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी ऐसे केंद्र कार्यान्वित करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार के इस फैसले से स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले युवाओं को नशे से दूर रखने, जागरूकता बढ़ाने और नशे की लत से जूझ रहे लोगों को इलाज व पुनर्वास की सुविधा देने की दिशा में कदम मजबूत होने की उम्मीद है।


