मुंबई : महाराष्ट्र से उद्योग बाहर जा रहे हैं और हजारों कंपनियां बंद हो गई हैं, ऐसी चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थिति साफ करने की कोशिश की है। फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र आज भी उद्योगों के मामले में देश में सबसे आगे है और ‘कंपनियां बंद’ होने के आंकड़ों का सीधा मतलब उद्योगों का राज्य से पलायन नहीं है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार की ओर से सामने आए आंकड़ों का कुछ लोगों ने सुविधानुसार अर्थ निकाला। उन्होंने बताया कि बंद बताई जा रही कंपनियों में करीब 76 प्रतिशत कंपनियां ‘डिफंक्ट’ हैं, यानी वे वास्तव में कभी सक्रिय रूप से काम ही नहीं कर पाईं। वहीं करीब 12 प्रतिशत कंपनियों का विलय हुआ है और 2 प्रतिशत कंपनियां विसर्जित हुई हैं। ऐसे में इन आंकड़ों को महाराष्ट्र से उद्योगों के बाहर जाने के तौर पर देखना सही नहीं होगा। फडणवीस ने बताया कि 3 जून 2026 तक महाराष्ट्र में 3 लाख 96 हजार 211 सक्रिय कंपनियां हैं। इस मामले में महाराष्ट्र दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों से काफी आगे है। दिल्ली में 2 लाख 72 हजार 342 और उत्तर प्रदेश में 1 लाख 85 हजार 982 सक्रिय कंपनियां दर्ज हैं।
चाकण के उद्योगों पर सरकार की नजर
चाकण औद्योगिक क्षेत्र में मौजूद समस्याओं को मुख्यमंत्री ने भी स्वीकार किया है। उन्होंने उद्योगमंत्री उदय सामंत को इन समस्याओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। एमआईडीसी की पहल पर हुई बैठक में समस्याओं के समाधान के लिए एक आराखड़ा तैयार किया गया है। सरकार का प्रयास है कि चाकण से एक भी उद्योग बाहर न जाए।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए उद्योगों से जुड़े सरकारी आंकड़ों की जानकारी उपलब्ध कराने वाली वेबसाइट भी साझा की। उन्होंने भरोसा जताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज की धरती महाराष्ट्र उद्योगों के क्षेत्र में आज भी पहले स्थान पर है और आगे भी अपनी यह बढ़त कायम रखेगा।


