नई दिल्ली : भारत और रूस के बीच अब सिर्फ समुद्री रास्ते ही नहीं, बल्कि सीधे जमीनी संपर्क की संभावनाओं पर भी चर्चा शुरू हो गई है। रूस की ओर से भारत तक रेल कॉरिडोर बनाने का एक प्रस्ताव सामने आया है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है, तो भविष्य में भारत और रूस के बीच माल ढुलाई के लिए एक नया और अहम रास्ता खुल सकता है।
रूस के उपप्रधानमंत्री ने भारत तक पहुंचने के लिए संभावित रेल मार्गों पर चर्चा करते हुए कहा कि तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रास्ते भारत से जुड़ने का विकल्प देखा जा सकता है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी शुरुआती स्तर पर है और इसे लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
किन देशों से होकर गुजरेगा प्रस्तावित रेल मार्ग?
प्रस्तावित कॉरिडोर में रूस से तुर्कमेनिस्तान, फिर ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत तक पहुंचने की संभावना बताई गई है। हालांकि, इस मार्ग का अंतिम स्वरूप अभी तय नहीं हुआ है। फिलहाल इस योजना के तहत न तो कोई निश्चित रेल रूट घोषित किया गया है और न ही यात्री ट्रेन, टिकट की कीमत या सेवा शुरू होने की तारीख तय हुई है। ऐसे में इसे फिलहाल एक संभावित रणनीतिक रेल कॉरिडोर के तौर पर देखा जा रहा है।
होर्मुज के दबाव के बीच क्यों आया प्रस्ताव?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक तेल व्यापार का करीब 25 प्रतिशत और एलएनजी का लगभग 20 प्रतिशत परिवहन इसी रास्ते से होता है। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच इस समुद्री मार्ग को लेकर अनिश्चितता बढ़ने पर वैकल्पिक रास्तों की जरूरत महसूस की जा रही है। रूस का मानना है कि जमीन के रास्ते नया परिवहन कॉरिडोर तैयार होने से समुद्री मार्गों पर निर्भरता कुछ हद तक कम की जा सकती है।
भारत के लिए क्या हो सकता है फायदा?
अगर यह रेल कॉरिडोर वास्तव में तैयार होता है, तो भारत को रूस और मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापारिक संपर्क मजबूत करने का नया अवसर मिल सकता है। दूसरी ओर रूस के लिए हिंद महासागर और भारतीय बाजार तक पहुंचने का एक वैकल्पिक जमीनी रास्ता तैयार हो सकता है। हालांकि, इस योजना को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। कई देशों से होकर गुजरने वाले इस कॉरिडोर के लिए बड़े पैमाने पर रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास करना होगा। इसके साथ ही सुरक्षा, सीमा पार परिवहन और अलग-अलग देशों के बीच समन्वय भी बड़ी चुनौती होगी।
अभी प्रस्ताव, आगे तस्वीर साफ होगी
भारत-रूस के बीच संभावित रेल कनेक्टिविटी का यह प्रस्ताव रणनीतिक और व्यापारिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है। लेकिन अभी इसे लेकर कई सवालों के जवाब बाकी हैं। रूट कब तय होगा, किन जगहों पर नई रेल लाइन बनेगी और यह कॉरिडोर कब तक शुरू हो सकेगा, इस पर आने वाले समय में तस्वीर साफ होने की उम्मीद है। अगर यह योजना आकार लेती है, तो भारत और रूस के बीच व्यापार के लिए एक नया अध्याय सुरू हो सकता है और मध्य एशिया के रास्ते भारत की कनेक्टिविटी को भी नई दिशा मिल सकती है।


