नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र का आखिरी सप्ताह आज से शुरू हो रहा है। पिछले 15 दिनों में संसद का कामकाज हंगामे और विरोध-प्रदर्शन के कारण काफी प्रभावित रहा। ऐसे में अब आखिरी सप्ताह भी शांतिपूर्ण रहने की संभावना कम नजर आ रही है। सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है, वहीं विपक्ष अपनी मांगों को लेकर अब भी अड़ा हुआ है। सोमवार के कामकाज में विदेशों से मिलने वाले फंड के नियमन से जुड़े FCRA विधेयक का उल्लेख नहीं है। हालांकि, इसे बुधवार को चर्चा और मंजूरी के लिए सदन में लाए जाने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस ने पहले ही इस विधेयक का कड़ा विरोध करने का संकेत दिया है।
केरल के नाम बदलने वाला बिल चर्चा में
केंद्र सरकार सोमवार को लोकसभा में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से केरल के नाम परिवर्तन से जुड़ा विधेयक और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से संबंधित संशोधन विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। वहीं, राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से भी एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया जा सकता है।
विपक्ष की मांगों पर सरकार से जवाब की उम्मीद
पिछले कई दिनों से विपक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में बयान की मांग कर रहा है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर भी विपक्ष सरकार से जवाब चाहता है। इसके अलावा राम मंदिर में कथित दान चोरी के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग भी विपक्ष की ओर से की जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा से बच रही है। वहीं, सरकार का कहना है कि सदन में कौन-सा मंत्री मौजूद रहेगा, यह विपक्ष तय नहीं कर सकता।
कामकाज के आंकड़े भी चिंताजनक
पिछले 15 दिनों में लोकसभा के निर्धारित 90 घंटे के कामकाज में केवल 15.36 घंटे ही काम हो सका। इसमें भी नारेबाजी और हंगामे का हिस्सा काफी अधिक रहा। हंगामे के बीच लोकसभा में आठ विधेयक पारित हुए। वहीं राज्यसभा में करीब 24.21 घंटे काम हुआ और छह विधेयक मंजूर किए गए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि संसद के आखिरी सप्ताह में सरकार और विपक्ष के बीच कोई रास्ता निकलता है या फिर महत्वपूर्ण मुद्दे एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ जाते हैं। साथ ही, सबकी नजर इस बात पर भी रहेगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह आखिरी सप्ताह में सदन में विपक्ष के सवालों का सामना करते हैं या नहीं।


