ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के धावक गुलवीर सिंह ने इतिहास रच दिया। मूसलाधार बारिश के बीच हुई 10,000 मीटर दौड़ में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने रजत पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। इस स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतने वाले वह पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं।
दौड़ की शुरुआत में गुलवीर शीर्ष तीन धावकों में शामिल थे, लेकिन कुछ ही देर बाद वह नौवें स्थान पर पहुंच गए। ऐसा लग रहा था कि पदक अब उनकी पहुंच से दूर है। लेकिन आखिरी पांच लैप में उन्होंने गजब की वापसी की। एक-एक कर सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए वह दूसरे स्थान पर फिनिश लाइन पार करने में सफल रहे। उनकी इस शानदार वापसी ने दर्शकों को भी रोमांचित कर दिया। ऑस्ट्रेलिया के काय रॉबिन्सन ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि गुलवीर सिंह ने 27 मिनट 49.78 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक अपने नाम किया। तीसरे स्थान पर आयल ऑफ मैन के डेविड मुल्लार्की रहे। तीनों खिलाड़ियों के बीच महज दो सेकंड का अंतर रहा, जिसने इस मुकाबले को और भी रोमांचक बना दिया।
उत्तर प्रदेश के सिरसा गांव से आने वाले 27 वर्षीय गुलवीर सिंह की सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत छिपी है। उनका सपना पहले भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना था। इसी तैयारी के दौरान उन्होंने दौड़ना शुरू किया और 2018 में स्पोर्ट्स कोटे से सेना की द ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट में भर्ती हुए। फिलहाल वह नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं।सेना में रहते हुए उनकी प्रतिभा को नई पहचान मिली। आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट और राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में अभ्यास के बाद उन्होंने लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया। अब कॉमनवेल्थ गेम्स का यह ऐतिहासिक सिल्वर उनकी मेहनत का सबसे बड़ा इनाम बन गया है। गुलवीर के नाम 3,000 मीटर, 5,000 मीटर और 10,000 मीटर के राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी दर्ज हैं। वह 2028 ओलंपिक के लिए भी पूरी तैयारी कर रहे हैं। जिस तरह उन्होंने ग्लासगो की बारिश में हार नहीं मानी, उसने करोड़ों भारतीयों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।


