वॉशिंगटन : रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। अमेरिकी सीनेट में एक ऐसे विधेयक पर मतदान होना है, जिसके मंजूर होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। इस प्रस्ताव से भारत, चीन और जापान जैसे देशों की चिंता बढ़ गई है।
अमेरिकी सांसदों का कहना है कि रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देश अप्रत्यक्ष रूप से रूस की आर्थिक मदद कर रहे हैं। उनका आरोप है कि भारत और चीन बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहे हैं, जिससे रूस को आर्थिक मजबूती मिल रही है। इसी वजह से इन देशों पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है। प्रस्तावित विधेयक में राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया जाएगा कि वे जरूरत पड़ने पर रूस से व्यापार करने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगा सकें। हालांकि यह टैरिफ स्वतः लागू नहीं होगा, बल्कि इसे लागू करने या हटाने का अंतिम फैसला राष्ट्रपति के हाथ में होगा। भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रियायती दरों पर रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात किया है। साथ ही आर्कटिक गैस परियोजनाओं में भी भारत की रुचि बढ़ी है। ऐसे में यदि अमेरिका यह कदम उठाता है, तो भारत के ऊर्जा आयात और व्यापारिक रणनीति पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक कानून बनता है और अमेरिका टैरिफ लागू करता है, तो भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो सकती है।फिलहाल सभी की नजर अमेरिकी सीनेट में होने वाले मतदान पर टिकी है। यदि विधेयक दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी हासिल कर लेता है, तो आगे की कार्रवाई राष्ट्रपति के निर्णय पर निर्भर करेगी।


