ईरान युद्ध ने अमेरिका की बढ़ाई मुश्किलें! सैन्य कमांडर ने दी रोक की सलाह, जनता भी युद्ध से थकी

लगातार सैन्य अभियान, हथियारों की कमी और बढ़ते जनविरोध के बीच ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ा; पेंटागन की पारदर्शिता पर भी उठे सवाल

ईरान और अमेरिका के बीच पिछले कई महीनों से जारी संघर्ष अब केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहा। इस युद्ध का असर अब अमेरिका के भीतर भी साफ दिखाई देने लगा है। एक ओर अमेरिकी सैन्य नेतृत्व लगातार हमलों को रोकने की सलाह दे रहा है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिक भी इस युद्ध को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन कई मोर्चों पर दबाव का सामना कर रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेंटकॉम (CENTCOM) प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने पेंटागन और व्हाइट हाउस को बताया कि लगातार दो सप्ताह तक चले अभियानों में ईरान के अधिकांश तय सैन्य ठिकानों को पहले ही निशाना बनाया जा चुका है। उनका मानना था कि यदि अमेरिका पूर्ण स्तर का युद्ध नहीं चाहता, तो रोजाना हवाई हमले जारी रखने से कोई बड़ा सैन्य लाभ नहीं मिलेगा। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य क्षेत्र में हमले रोकने के निर्देश दिए। वहीं जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने भी प्रशासन को चेतावनी दी कि THAAD और Patriot जैसे एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी भविष्य में अमेरिकी सेना और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

युद्ध शुरू होने के करीब पांच महीने बाद सामने आए CBS News/YouGov सर्वे में भी ट्रंप प्रशासन के लिए चिंताजनक संकेत मिले हैं। सर्वे के मुताबिक, तीन-चौथाई से अधिक लोगों का मानना है कि यह युद्ध अमेरिका की उम्मीद से कहीं अधिक कठिन साबित हुआ है। वहीं लगभग दो-तिहाई लोगों ने अब इस संघर्ष को समाप्त करने की मांग की है। युद्ध का असर आम अमेरिकी नागरिकों की जेब पर भी पड़ रहा है। होर्मुज़ क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर अमेरिका में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के रूप में देखा जा रहा है।

इस बीच पेंटागन भी विवादों में घिर गया है। शुरुआत में सैनिकों के हताहत होने के आंकड़े कम बताए गए, लेकिन बाद में अपडेट की गई सूची में 140 से अधिक घायल सैनिकों के नाम जोड़े गए। इसके साथ ही “Overseas Operations” नाम से नई श्रेणी शुरू किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी सांसदों ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ से इस पूरे मामले पर जवाब मांगा है। हालांकि पेंटागन ने इन विसंगतियों के लिए वेबसाइट में आई तकनीकी समस्या को जिम्मेदार बताया है, लेकिन कई सवालों के जवाब अब भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। कुल मिलाकर, सैन्य सलाह, जनता के बढ़ते विरोध, हथियारों की कमी और पारदर्शिता को लेकर उठते सवालों ने ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका इस युद्ध को लेकर क्या रणनीति अपनाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।

 

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