नई दिल्ली : देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों और छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। सरकार सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन करने जा रही है। नए प्रस्ताव के अनुसार, पेपर लीक के दोषियों को कम से कम 10 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में पेपर लीक के मामलों ने छात्रों की चिंता बढ़ा दी थी। नीट परीक्षा विवाद के बाद दिल्ली सहित कई जगहों पर छात्रों ने प्रदर्शन किए और परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग उठाई। इसी को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों में तेजी से सुनवाई और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के निर्देश दिए हैं। प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक से जुड़े सभी अपराधों को गैर-जमानती बनाने की भी तैयारी है। यानी ऐसे मामलों में आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिल सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे परीक्षा माफियाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।
इसके अलावा, पेपर लीक से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित की जाएंगी। दिल्ली के राउज एवेन्यू न्यायालय में इस तरह की विशेष अदालत शुरू करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जहां परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी। जानकारी के मुताबिक, इस संशोधन विधेयक को पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसके बाद इसे संसद के मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह में पेश किए जाने की संभावना है। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो भविष्य में पेपर लीक जैसे मामलों में पहले से कहीं अधिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।


