नई दिल्ली : भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 23 जुलाई को ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से ‘कुशा’ (Kusha) लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Long-Range Surface-to-Air Missile) का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया।
परीक्षण के दौरान मिसाइल ने तेज गति और ऊंचाई पर उड़ रहे इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य को सटीकता के साथ निशाना बनाकर नष्ट किया। इस सफलता के साथ भारत ने अपनी स्वदेशी वायु रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। ‘कुशा’ मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमान, मिसाइल, ड्रोन और बड़े दुश्मन विमानों जैसे कई हवाई खतरों को लंबी दूरी और अलग-अलग ऊंचाई पर निष्क्रिय करने में सक्षम है। इस प्रणाली के सभी प्रमुख हिस्से, जिनमें मिसाइल, रडार और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर शामिल हैं, DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं और भारतीय उद्योग साझेदारों द्वारा विकसित किए गए हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर DRDO की टीम को बधाई देते हुए कहा कि ‘कुशा’ का सफल परीक्षण भारत के रक्षा अनुसंधान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि अब ऐसे अत्याधुनिक वायु रक्षा सिस्टम के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। रक्षा सचिव एवं DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने भी परीक्षण के दौरान पूरी प्रक्रिया की निगरानी की और इस सफलता में शामिल सभी वैज्ञानिकों एवं टीम के सदस्यों को शुभकामनाएं दीं। ‘कुशा’ मिसाइल का सफल परीक्षण न केवल भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति को मजबूत करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि देश अब आधुनिक रक्षा तकनीक के क्षेत्र में तेजी से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।


