हर मेडिकल स्टोर पर CCTV की नजर! सरकार के नए प्रस्ताव से दवा विक्रेताओं में चिंता, जानिए क्यों हो रहा विरोध

दवाओं की अवैध बिक्री रोकने के लिए सख्त निगरानी की तैयारी, लेकिन छोटे मेडिकल स्टोर संचालकों ने खर्च और तकनीकी दिक्कतों पर उठाए सवाल

अब देशभर के मेडिकल स्टोर पर CCTV कैमरों से निगरानी की तैयारी है। औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने दवा बिक्री केंद्रों पर CCTV कैमरे लगाने और मादक व मनोविकारक दवाओं की पूरी सप्लाई चेन में रिकॉर्ड रखने की सिफारिश की है। सरकार का उद्देश्य दवाओं की अवैध बिक्री और बिना डॉक्टर की पर्ची के होने वाली बिक्री पर रोक लगाना है। हालांकि, इस प्रस्ताव ने छोटे दवा विक्रेताओं की चिंता बढ़ा दी है।

27 अगस्त की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी

औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने 27 अगस्त को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके तहत मेडिकल स्टोर पर CCTV कैमरे लगाने के साथ-साथ मादक और मनोविकारक दवाओं की सप्लाई चेन का रिकॉर्ड रखने की सिफारिश की गई है। अब यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी और लागू करने के लिए भारत के औषधि नियंत्रक महासंचालक डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी के पास है।

CCTV लगाने के पीछे क्या है वजह?

दवा दुकानों के जरिए मादक दर्द निवारक दवाओं और नशे की आदत लगाने वाली कुछ खांसी की दवाओं के अवैध बाजार तक पहुंचने को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। सरकार का मानना है कि CCTV फुटेज से बिक्री का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और डॉक्टर की पर्ची के बिना दवा बेचने वाले दुकानदारों की पहचान करने में मदद मिलेगी। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी बच्चों में नशे की लत को रोकने के लिए दवाओं की बिक्री पर कड़ी निगरानी की जरूरत बताई है।

छोटे मेडिकल स्टोर के सामने बड़ा खर्च

सरकार के प्रस्ताव पर दवा विक्रेताओं ने खर्च को लेकर सवाल उठाए हैं। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने 17 सितंबर को स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव को पत्र लिखकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। दवा विक्रेताओं के अनुसार, एक दुकान में छह से आठ CCTV कैमरे, DVR सिस्टम, हार्ड डिस्क स्टोरेज, वायरिंग, इंटरनेट और रखरखाव का खर्च करीब 50 हजार से 1 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। कम मुनाफे पर चलने वाले छोटे मेडिकल स्टोर के लिए यह अतिरिक्त खर्च उठाना आसान नहीं होगा।

गांवों में तकनीकी दिक्कत भी बड़ी चुनौती

ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बिजली कटौती और कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी भी बड़ी समस्या बन सकती है। ऐसे क्षेत्रों में 24 घंटे लगातार CCTV रिकॉर्डिंग और उसका स्टोरेज बनाए रखना दुकानदारों के लिए मुश्किल हो सकता है। दवा विक्रेताओं का कहना है कि बड़े कॉर्पोरेट ब्रांड इस तरह का खर्च आसानी से उठा सकते हैं, लेकिन छोटे शहरों और गांवों में लंबे समय से लोगों तक दवाएं पहुंचाने वाले छोटे दुकानदारों पर इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। अब देखना होगा कि अंतिम मंजूरी के बाद सरकार इस प्रस्ताव को किस तरह लागू करती है और छोटे दवा विक्रेताओं की चिंताओं को लेकर क्या व्यवस्था की जाती है।

लोकतंत्र मिरर

लोकतंत्र मिरर जनता का भरोसेमंद न्यूज चैनल 📍 महाराष्ट्र | पूरे भारत की खबरें ⚡ राजनीति | व्यापार | मनोरंजन | खेल | ताजा अपडेट 📢 ब्रांड प्रमोशन/ विज्ञापन के लिए संपर्क करे: 📞 9545924968/7758043733

Related Posts

आतंकवाद को नीति का हथियार बनाना बर्दाश्त नहीं! जयशंकर ने पाकिस्तान को सुनाया दो टूक संदेश

नई दिल्ली : आतंकवाद के कारण दुनिया के कई हिस्सों में शांति और सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। ऐसे में भारत ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ अपना…

125 किलोमीटर का रेल मार्ग, 103 किलोमीटर सुरंगों से! हिमालय में बन रही भारतीय रेलवे की अनोखी लाइन

नई दिल्ली : पहाड़ों की ऊंचाइयों के बीच बसे धार्मिक स्थलों तक पहुंचना अब पहले से आसान होने वाला है। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भारतीय रेलवे एक ऐसे…