पुणे : गणेशोत्सव आते ही हर तरफ बप्पा के स्वागत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लेकिन देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए यह त्योहार कुछ अलग मायने रखता है। ड्यूटी के कारण वे पुणे आकर गणेशोत्सव में शामिल नहीं हो पाते, इसलिए इस बार बप्पा खुद उनके पास पहुंच रहे हैं।
श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट और सुवर्णयुग तरुण मंडल की पहल से भारतीय सेना की विभिन्न मराठा लाइट इन्फैंट्री यूनिट्स के जवानों के लिए दगडूशेठ गणपति की 2 फीट की प्रतिकात्मक मूर्तियां रवाना की गई हैं। इन मूर्तियों की स्थापना कारगिल, जम्मू, अयोध्या, राजस्थान सहित देश के अलग-अलग सीमावर्ती क्षेत्रों में की जाएगी।
जवानों की इच्छा पर ट्रस्ट ने उठाया कदम
सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों ने दगडूशेठ गणपति की प्रतिकात्मक मूर्ति स्थापित करने की इच्छा जताई थी। जवानों की इस भावना को सम्मान देते हुए ट्रस्ट ने उन्हें दगडूशेठ गणपति की हुबहू प्रतिकात्मक मूर्तियां उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। हाल ही में ये मूर्तियां सेना की संबंधित यूनिट के जवानों को मंदिर में सुपुर्द की गईं। इसके बाद इन्हें देश के अलग-अलग सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए रवाना किया गया।
16 साल से जारी है परंपरा
दगडूशेठ गणपति ट्रस्ट और मराठा बटालियन के बीच यह भावनात्मक जुड़ाव नया नहीं है। वर्ष 2011 से दोनों के बीच करीबी संबंध हैं। पिछले 16 वर्षों से सीमावर्ती क्षेत्रों में दगडूशेठ गणपति की प्रतिकात्मक मूर्ति स्थापित करने का यह सिलसिला जारी है। इस वर्ष भारतीय सेना की 24, 5, 19 और 1 मराठा लाइट इन्फैंट्री यूनिट के जवानों को मूर्तियां दी गई हैं। हर साल इस पहल से जुड़ने वाली बटालियन की संख्या भी बढ़ रही है।
बप्पा देंगे जवानों को नई ऊर्जा
ट्रस्ट के अध्यक्ष सुनील रासने ने कहा कि सीमा पर तैनात जवान दिन-रात देश की सुरक्षा में जुटे रहते हैं। ऐसे में सेना के ठिकानों पर गणेश प्रतिमा की स्थापना जवानों को एक अलग तरह की ऊर्जा और अपनापन देती है। गणेशोत्सव के दौरान मराठा बटालियन के जवान भी बड़े उत्साह से बप्पा की आराधना करते हैं। इस बार दगडूशेठ गणपति की प्रतिकात्मक मूर्तियां उनके साथ होने से पुणे और सीमा पर तैनात जवानों के बीच आस्था का यह रिश्ता और मजबूत होगा। देश के अलग-अलग राज्यों से आए जवान सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात हैं। ऐसे में बप्पा का आशीर्वाद हर जवान तक पहुंचे, यही इस पहल के पीछे की भावना है।


