नागपुर : शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है। बदलते दौर की जरूरतों के अनुसार शिक्षा व्यवस्था में बदलाव जरूरी है, तभी उसका वास्तविक लाभ विद्यार्थियों और समाज को मिलेगा। यह बात यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र मुक्त विश्वविद्यालय, नाशिक के प्र-कुलगुरू प्रो. जोगेंद्र सिंह बिसेन ने कही।
राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग में ‘अपनी शिक्षा–महत्व और चुनौतियाँ’ विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा समय, समाज, पर्यावरण और वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रो. बिसेन ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर, सक्षम और व्यवहारिक बनाना भी है। बदलती परिस्थितियों के साथ शिक्षा में नवाचार और कौशल विकास को प्राथमिकता देना समय की मांग है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पांडे ने की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के व्यक्तित्व का विकास करती है और उसे आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती है। शिक्षा व्यवस्था जितनी अधिक प्रयोगशील और मूल्य आधारित होगी, उसका महत्व उतना ही बढ़ेगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित रहे तथा व्याख्यान का लाभ उठाया।


