मुंबई : महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के गिरडा में श्री संत गजानन महाराज संस्थान, शेगांव के विकास का रास्ता साफ हो गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने संस्थान को 3.81 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर स्थायी निर्माण की अनुमति देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे गिरडा में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम आगे बढ़ सकेगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की पहल पर मंजूर हुए इस प्रस्ताव से गिरडा में धार्मिक पर्यटन के साथ स्वास्थ्य, आवास और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
श्रद्धालुओं को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
श्री संत गजानन महाराज संस्थान, शेगांव लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। गिरडा में भी श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसके तहत स्मृति केंद्र, इको टूरिज्म सेंटर, शांति कुटीर, आवास परिसर, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, आयुर्वेदिक अनुसंधान केंद्र, अस्पताल और ग्रामीण कुटीर उद्योगों से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। इन सुविधाओं के तैयार होने से गिरडा आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलने में मदद मिलेगी। साथ ही, प्राकृतिक चिकित्सा और ग्रामीण कुटीर उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।
पहले वृक्षारोपण के लिए मिली थी जमीन
गिरडा में संस्थान को पहले वृक्षारोपण के उद्देश्य से 19.06 हेक्टेयर सरकारी जमीन आवंटित की गई थी। हालांकि, क्षेत्र में प्रस्तावित विकास कार्यों के लिए स्थायी निर्माण की अनुमति आवश्यक थी। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 3.81 हेक्टेयर जमीन पर स्थायी निर्माण के लिए विशेष मंजूरी दी है। इसके लिए महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता, 1966 के प्रावधानों और 16 अगस्त 1990 के शासन निर्णय में निर्धारित नियमों से विशेष छूट प्रदान की गई है। निर्माण की अनुमति शासन द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन रहेगी।
बावनकुले ने संस्थान के पदाधिकारियों को दी बधाई
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस निर्णय पर खुशी व्यक्त करते हुए संस्थान के सभी पदाधिकारियों, संस्थान के अध्यक्ष और क्षेत्रीय विधायक संजय कुटे को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। बावनकुले के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में लिए गए इस निर्णय से गिरडा में यात्रास्थल के विकास को गति मिलेगी। स्मृति केंद्र, अस्पताल, आयुर्वेदिक अनुसंधान केंद्र, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र और आवास परिसर जैसी सुविधाओं के निर्माण से श्रद्धालुओं को लाभ होगा। कुल मिलाकर, गिरडा में 3.81 हेक्टेयर जमीन पर स्थायी निर्माण की मंजूरी से धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य और आवास सुविधाओं के विकास की उम्मीद बढ़ी है। अब इन प्रस्तावित सुविधाओं को जमीन पर उतारना अगला महत्वपूर्ण कदम होगा।


