विदर्भ में बारिश ने दिया दगा, 27% कम बारिश; 8 जिले सूखे की चपेट में

अमरावती में सबसे ज्यादा 43% बारिश की कमी, नागपुर-वर्धा में भी 34% घाटा; अब विदर्भ की नजरें अक्टूबर की बारिश पर

नागपुर : विदर्भ में इस बार बारिश ने लोगों को निराश किया है। मानसून का सीजन लगभग खत्म हो चुका है, लेकिन बारिश की कमी ने आने वाले दिनों की चिंता बढ़ा दी है। 1 जून से 30 सितंबर के बीच पूरे विदर्भ में औसतन 27 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। 11 में से 10 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि 8 जिले सूखे की श्रेणी में पहुंच गए हैं। पूरे विदर्भ में इस अवधि के दौरान 687.3 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर 937.3 मिमी बारिश होती है। यानी करीब 250 मिमी बारिश कम हुई है। इसका असर आने वाले दिनों में खेती, पानी और ग्रामीण जीवन पर देखने को मिल सकता है।

अमरावती और अकोला सबसे ज्यादा प्रभावित

बारिश की कमी के मामले में अमरावती सबसे आगे है। यहां 472.1 मिमी बारिश हुई, जबकि औसत 822.9 मिमी है। जिले में बारिश की कमी 43 फीसदी रही। इसके बाद अकोला में 41 फीसदी बारिश कम हुई।वाशिम में 37 फीसदी, नागपुर और वर्धा में 34-34 फीसदी, चंद्रपुर में 33 फीसदी और यवतमाल में 27 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई है। बुलढाणा में भी सामान्य से 21 फीसदी कम बारिश हुई। इन आंकड़ों से साफ है कि विदर्भ के कई हिस्सों में मानसून ने उम्मीद के मुताबिक साथ नहीं दिया।

सिर्फ तीन जिलों में बारिश सामान्य

विदर्भ के सभी जिलों की स्थिति एक जैसी नहीं रही। भंडारा, गडचिरोली और गोंदिया में बारिश सामान्य श्रेणी में रही। गोंदिया में सिर्फ 1 फीसदी की कमी दर्ज हुई। वहीं भंडारा और गडचिरोली में 16-16 फीसदी बारिश कम हुई, फिर भी दोनों जिले सामान्य बारिश की श्रेणी में रहे। गोंदिया में 1206.4 मिमी, गडचिरोली में 1082.3 मिमी और भंडारा में 911.2 मिमी बारिश दर्ज की गई।

अब परती के मानसून से उम्मीद

मानसून ने उत्तर भारत से वापसी शुरू कर दी है। आमतौर पर विदर्भ से मानसून 5 से 10 अक्टूबर के बीच विदा होता है। इस बार उसके निर्धारित समय से पहले ही लौटने की संभावना जताई जा रही है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि परती के दौरान विदर्भात पावसासाठी अनुकूल प्रणाली विकसित झालेली नाही. ऐसे में मानसून की वापसी भी सूखी रहने की आशंका है। मानसून के आखिरी दौर में भी अच्छी बारिश नहीं हुई तो पहले से बारिश की कमी झेल रहे विदर्भ के लिए आने वाला समय और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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