नागपुर : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में आयोजित दिव्यांग सहायता सामग्री वितरण शिविर में बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहना नागपुर महानगरपालिका के 39 भाजपा नगरसेवकों को भारी पड़ सकता है। कार्यक्रम में गैरहाजिर रहने वाले नगरसेवकों को सत्तापक्ष नेता बाल्या बोरकर ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस पाने वालों में 22 पुरुष और 17 महिला नगरसेवक शामिल हैं। इनमें कुछ महिला सभापति और वरिष्ठ नगरसेवकों के नाम भी होने की जानकारी सामने आई है। इस कार्रवाई के बाद मनपा के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री कार्यक्रम में नहीं पहुंचे नगरसेवक
दिव्यांगों को सहायता सामग्री वितरित करने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद थे। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नागपुर के कार्यक्रम के लिए एक दिन पहले रात करीब 2 बजे शहर पहुंचे और अगले दिन सुबह 8 बजे सीधे भट सभागृह में कार्यक्रम में शामिल हुए। ऐसे में शहर में रहने वाले भाजपा के कुछ नगरसेवकों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी की ओर से कार्यक्रम में उपस्थिति को लेकर पहले से निमंत्रण दिए जाने के बावजूद बिना सूचना गैरहाजिर रहने पर अब उनसे जवाब मांगा गया है।
जवाब संतोषजनक नहीं तो अनुशासनात्मक कार्रवाई
बाल्या बोरकर ने गैरहाजिर नगरसेवकों की सूची भाजपा शहराध्यक्ष दयाशंकर तिवारी को भी भेजी है। साथ ही संबंधित नगरसेवकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यदि नगरसेवकों की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं रहा, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
क्या विकास निधि पर भी लगेगी रोक?
इस पूरे मामले में एक और चर्चा सामने आ रही है। बिना पूर्व सूचना कार्यक्रम से अनुपस्थित रहने वाले नगरसेवकों के विकास निधि या प्रभाग निधि पर रोक लगाने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, स्थायी समिति की ओर से निधि वितरित करने से पहले संबंधित नगरसेवकों से गैरहाजिरी को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जाए और जवाब संतोषजनक नहीं होने पर निधि रोकने की सिफारिश की गई है।
वरिष्ठ नगरसेवकों में नाराजगी
वहीं, नोटिस जारी होने के बाद कुछ वरिष्ठ नगरसेवकों में नाराजगी की भी चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, नोटिस पाने वालों में ऐसे कई वरिष्ठ नगरसेवक हैं, जिनके साथ सत्तापक्ष नेता बाल्या बोरकर की पहले भी मतभेद की स्थिति रही है। एक वरिष्ठ नगरसेवक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इससे पहले किसी कार्यक्रम में अनुपस्थिति को लेकर इस तरह नोटिस जारी करने की परंपरा नहीं रही। नगरसेवकों की अपनी व्यक्तिगत समस्याएं या मजबूरियां भी हो सकती हैं। ऐसे में नोटिस जारी करने की बात को सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं थी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि 39 नगरसेवकों की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है और पार्टी इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है।


