राज्य सरकार ने खर्च की समीक्षा के बाद महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी को बंद करने का निर्णय लिया है। जानकारी के मुताबिक, 25 करोड़ रुपये से कम खर्च वाली योजनाओं की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है। इस निर्णय से अब तटीय क्षेत्रों के पर्यावरण संरक्षण का काम किस तरह किया जाएगा, इस पर ध्यान केंद्रित हो गया है। समुद्र तटों पर बढ़ते पर्यावरणीय दबाव के बीच इस प्राधिकरण को बंद करने के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या काम करता था यह प्राधिकरण?
महाराष्ट्र कोस्टल जोन मैनेजमेंट अथॉरिटी का मुख्य काम राज्य के समुद्र तटीय क्षेत्रों में पर्यावरण का संरक्षण और प्रबंधन करना था। इसके अंतर्गत पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करना, उनके संरक्षण के लिए योजनाएं तैयार करना और तटीय पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना शामिल था। इसके अलावा, समुद्र तटों पर मौजूद मैंग्रोव यानी कांदळवन के संरक्षण और प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखने में भी इस प्राधिकरण की भूमिका महत्वपूर्ण थी।
मैंग्रोव का संरक्षण क्यों है जरूरी?
समुद्र तटों पर मौजूद मैंग्रोव केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं हैं, बल्कि वे तटीय पर्यावरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये समुद्री लहरों और तटीय कटाव के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही, कई जलीय जीवों और पक्षियों को इन क्षेत्रों में आश्रय मिलता है। ऐसे में तटीय पर्यावरण के संरक्षण से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव होने पर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
अब कौन संभालेगा संरक्षण की जिम्मेदारी?
राज्य सरकार ने 25 करोड़ रुपये से कम खर्च वाली योजनाओं की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया है। हालांकि, प्राधिकरण बंद होने के बाद उसकी जिम्मेदारियां किस विभाग या दूसरी सरकारी व्यवस्था को सौंपी जाएंगी, इस बारे में स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है। एक ओर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर चुनौतियां सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव और जैव विविधता का संरक्षण भी बड़ी जिम्मेदारी है।
ऐसे में सरकार के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि खर्च कम करने की कवायद के बीच पर्यावरण संरक्षण के काम पर इसका क्या असर पड़ेगा। तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा और वहां रहने वाले जीवों के प्राकृतिक आवास को बचाए रखने के लिए आगे क्या व्यवस्था की जाती है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।


