कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद और अभिनेत्री कोयल मलिक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। खास बात यह है कि उन्हें ममता बनर्जी ने इसी साल अप्रैल में राज्यसभा भेजा था और महज तीन महीने के भीतर उनके इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
कोयल मलिक ने करीब एक महीने पहले ही इस्तीफा देने का संकेत दे दिया था। गुरुवार को उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से सामने आने के बाद TMC में हलचल तेज हो गई। विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी पहले से ही लगातार चुनौतियों का सामना कर रही है और अब इस इस्तीफे को ममता बनर्जी के लिए एक और राजनीतिक झटका माना जा रहा है। पिछले कुछ महीनों में तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और सांसद पार्टी से अलग हो चुके हैं। इससे पहले सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर ने भी राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। बाद में दोनों भाजपा में शामिल हुए और भाजपा के समर्थन से दोबारा राज्यसभा पहुंचे।
सूत्रों के अनुसार, विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई नेताओं ने अलग गुट बना लिया है, जबकि कुछ नेताओं ने अन्य दलों के साथ जाने का फैसला किया है। इसी क्रम में मदन मित्रा ने भी तृणमूल कांग्रेस की सभी राष्ट्रीय और संगठनात्मक समितियों से इस्तीफा देने की घोषणा की है। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य प्रतोद पद से भी इस्तीफा दे दिया। मदन मित्रा अब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे केवल संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हट रहे हैं और पार्टी की कार्यशैली से असहमति के कारण यह कदम उठाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोयल मलिक का इस्तीफा केवल एक सांसद का पद छोड़ना नहीं है, बल्कि यह तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत भी हो सकता है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इस संकट से कैसे निपटता है।


