नागपुर : महावितरण के कर्मचारियों के लिए आयोजित नागपुर प्रादेशिक आंतरपरिमंडलीय नाट्यस्पर्धा में इस बार मंच पर बिजली से जुड़े काम करने वाले कर्मचारियों का एक अलग ही हुनर देखने को मिला। दो दिनों तक चले इस नाट्योत्सव में कलाकारों ने अपने अभिनय, संवाद और प्रभावी प्रस्तुति से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। नागपुर परिमंडल के ‘थलाई कुथल’ नाटक ने सर्वश्रेष्ठ नाटक का प्रथम पुरस्कार अपने नाम किया, जबकि अकोला परिमंडल का ‘चिंधी बाजार’ उपविजेता रहा।
प्रतियोगिता में अकोला के ‘चिंधी बाजार’, अमरावती के ‘गुलाम’, नागपुर के ‘थलाई कुथल’ और चंद्रपुर के ‘एक होती राणी’ नाटकों की प्रस्तुति हुई। अलग-अलग विषयों और कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को दो दिनों तक बांधे रखा। पुरस्कार वितरण महावितरण के संचालक (संचलन) धनंजय ओंढेकर और कार्यकारी संचालक (नियोजन व ई-वाहन चार्जिंग स्टेशन्स) प्रसाद रेशमे के हाथों किया गया। इस अवसर पर नागपुर परिक्षेत्र के प्रभारी प्रादेशिक संचालक तथा नागपुर परिमंडल के मुख्य अभियंता राजेश नाईक, मुख्य अभियंता दिलीप दोडके, दत्तात्रय बनसोडे और हरिश गजबे सहित परीक्षक महेश पातुरकर, विवेक खेर और मिनाक्षी बोरकर उपस्थित रहे।
संचालक धनंजय ओंढेकर ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि प्रतियोगिता में जीत-हार होती रहती है। जिन्हें इस बार सफलता नहीं मिली, वे निराश न हों और अगले वर्ष नई ऊर्जा के साथ मंच पर उतरें। वहीं प्रसाद रेशमे ने कहा कि कलाकार के लिए मंच पर प्रस्तुति देते समय मिलने वाला आनंद और दर्शकों के चेहरे पर आने वाली मुस्कान ही सबसे बड़ा पुरस्कार है। आयोजक राजेश नाईक ने कहा कि महावितरण के कर्मचारियों ने मंच पर सिर्फ बिजली ही नहीं, बल्कि अपने अभिनय की भी रोशनी बिखेरी। प्रस्तुत किए गए प्रत्येक नाटक में समाज के लिए सकारात्मक संदेश देखने को मिला। परीक्षक विवेक खेर ने भी कर्मचारियों के भीतर छिपी प्रतिभाओं को मंच देने और उन्हें परिवार की तरह प्रोत्साहित करने के लिए महावितरण की सराहना की।
अलग-अलग विधाओं में भी कलाकारों का दबदबा
दिग्दर्शन में ‘थलाई कुथल’ के प्रफुल लांडे प्रथम और ‘चिंधी बाजार’ के संजय पुरकर द्वितीय रहे। उत्कृष्ट पुरुष अभिनय में ‘थलाई कुथल’ के प्रशांत मडावी प्रथम और ‘चिंधी बाजार’ के रोशन समदुरे द्वितीय रहे। महिला अभिनय में ‘चिंधी बाजार’ की सुप्रिया घुटके प्रथम तथा ‘एक होती राणी’ की रोहिणी ठाकरे द्वितीय रहीं। नेपथ्य में ‘गुलाम’ के सुधीर खुजनारे प्रथम और ‘एक होती राणी’ के रमेश सानप द्वितीय रहे। प्रकाश योजना में ‘थलाई कुथल’ के जयंत बाणेरकर प्रथम तथा ‘चिंधी बाजार’ के अजितपाल सिंह दिनोरे द्वितीय रहे।
पार्श्वसंगीत में ‘थलाई कुथल’ के अमित पेढेकर प्रथम और ‘एक होती राणी’ के असित ढाकणेकर व डॉ. अविनाश आचार्य द्वितीय रहे। रंगभूषा-वेशभूषा में ‘थलाई कुथल’ की अनुश्री पांडे और स्वाती फाटे प्रथम तथा ‘एक होती राणी’ के प्रविण बिसेन और अरविंद कातकर द्वितीय रहे। उत्तेजनार्थ पुरस्कार से उषा धोटे, वैभव इंगळे, असित रामटेके और भाविन नांढा को सम्मानित किया गया। वहीं बाल कलाकार अमय मोरे और जीतु सिंह को विशेष उत्तेजनार्थ पुरस्कार मिला। दो दिनों के इस आयोजन ने यह दिखाया कि महावितरण के कर्मचारियों की पहचान सिर्फ उनके रोजमर्रा के काम तक सीमित नहीं है। मंच पर मौका मिलते ही इन्हीं कर्मचारियों ने अभिनय और कला के जरिए अपनी अलग पहचान भी दिखाई।


