ठाणे : भाईंदरपाड़ा (ओवला) की करीब 412 हेक्टेयर विवादित जमीन को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने जमीन के रिकॉर्ड में निजी नाम दर्ज करने वाली फेरफार प्रविष्टि क्रमांक 975 को रद्द करने का आदेश दिया है। अब इस जमीन के रिकॉर्ड में दोबारा ‘महाराष्ट्र शासन आरक्षित वन’ दर्ज किया जाएगा।
इस जमीन के स्वामित्व और वनभूमि के दर्जे को लेकर कई वर्षों से विवाद चल रहा था। वर्ष 2015 में उपविभागीय अधिकारी ने फेरफार प्रविष्टि क्रमांक 975 को रद्द कर दिया था। इसके बाद अपर जिलाधिकारी ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। हालांकि, वर्ष 2019 में अपर आयुक्त ने दोनों आदेशों को रद्द करते हुए फेरफार प्रविष्टि को कायम रखा था। इसके बाद मामला राजस्व न्यायाधिकरण से होते हुए उच्च न्यायालय तक पहुंचा।
राजस्व न्यायाधिकरण ने 31 दिसंबर 2025 को फेरफार प्रविष्टि को कायम रखने का फैसला सुनाया था। इसके खिलाफ राजस्व एवं वन विभाग ने पुनर्विचार याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान महसूल मंत्री ने उच्च न्यायालय के 7 मई 2025 के आदेश का भी हवाला दिया। अदालत ने अपर आयुक्त के आदेश को लागू करने की अनुमति दी थी, लेकिन उसे लागू करना अनिवार्य नहीं किया था।
वन क्षेत्र में होने की बात सामने आई
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित जमीन वास्तव में वन क्षेत्र में है और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के अधीन आती है। इसी आधार पर महसूल मंत्री ने राजस्व न्यायाधिकरण के 31 दिसंबर 2025 के आदेश और अपर आयुक्त के 2019 के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही, ठाणे जिलाधिकारी को इस जमीन की तीन महीने के भीतर जांच कर वन विभाग को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
412 हेक्टेयर जमीन का विवाद
इस विवाद में पुराने सर्वे नंबर 291 के नए सर्वे नंबर 22/1, 22/4 और 22/5 तथा पुराने सर्वे नंबर 297 के नए सर्वे नंबर 21 की कुल करीब 412 हेक्टेयर जमीन शामिल है।
फिर दर्ज होगा ‘आरक्षित वन’
महसूल मंत्री ने 6 अगस्त को फेरफार प्रविष्टि क्रमांक 975 रद्द करने का फैसला लिया। अब जमीन के रिकॉर्ड में फिर से ‘महाराष्ट्र शासन आरक्षित वन’ दर्ज किया जाएगा। लंबे समय से चले आ रहे इस जमीन विवाद में सरकार के इस फैसले को अहम मोड़ माना जा रहा है।


