चंद्रपुर : महाराष्ट्र के प्रसिद्ध ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व में शनिवार को उस समय उत्साह का माहौल बन गया, जब ब्रिक्स देशों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने सफारी के दौरान कई वाघों का दर्शन किया। प्रतिनिधियों ने इस अनुभव को “अविस्मरणीय” बताते हुए कहा कि प्रकृति और वन्यजीवन को इतने करीब से देखना उनके लिए बेहद खास रहा।
करीब 70 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के लिए कोलारा, मदनापुर और बेलारा बफर गेटों से 20 से अधिक सफारी वाहनों की व्यवस्था की गई थी। सुबह की सफारी में रूस और इथियोपिया के प्रतिनिधियों को चर्चित वाघ टी-178 और टी-82 के एक उप-वयस्क शावक का दर्शन हुआ। वहीं शाम की सफारी में दक्षिण अफ्रीका, मिस्र और ईरान के प्रतिनिधियों ने टी-178, टी-82 के उप-वयस्क शावक तथा टीएन-9 के उप-वयस्क शावक को देखा। सिर्फ वाघ ही नहीं, प्रतिनिधियों ने चीतल, सांभर, भारतीय गौर, जंगली सूअर और विभिन्न पक्षियों को भी नजदीक से देखा। मानसून की बारिश के बाद हरियाली से भर चुके जंगल ने इस सफारी को और भी खूबसूरत बना दिया। कई प्रतिनिधि सफारी के बाद उत्साह से अपने अनुभव साझा करते नजर आए।
ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. प्रभु नाथ शुक्ला और डिप्टी डायरेक्टर श्री विशाल माली के नेतृत्व में पूरी व्यवस्था संभाली गई। वन विभाग की टीम ने सुरक्षा, परिवहन और मार्गदर्शन की जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभाई। प्रतिनिधिमंडल को ताडोबा में चल रहे आवास प्रबंधन, शिकार विरोधी अभियान और समुदाय आधारित संरक्षण कार्यों की भी जानकारी दी गई। विदेशी मेहमानों ने रिजर्व के वैज्ञानिक प्रबंधन की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने वाघ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। इस दौरे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत में जिम्मेदार वन्यजीव पर्यटन और वाघ संरक्षण का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।


