नागपुर : पूर्व विदर्भ के लिए आने वाला समय सड़क कनेक्टिविटी के लिहाज से बड़ा बदलाव लेकर आ सकता है। नागपुर से गोंदिया, चंद्रपुर और भंडारा होते हुए गडचिरोली तक तेज रफ्तार सड़क नेटवर्क तैयार करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। चार महत्वपूर्ण महामार्ग परियोजनाओं के लिए कुल 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है।
इन परियोजनाओं के जरिए पूर्व विदर्भ के अलग-अलग जिलों के बीच सफर आसान होने के साथ ही कृषि उपज, खनिज और औद्योगिक सामान की आवाजाही को भी गति मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इन परियोजनाओं के तहत 460 किलोमीटर से अधिक लंबाई के मार्ग विकसित किए जाएंगे।
नागपुर से गोंदिया तक 162 किमी से ज्यादा का मार्ग
नागपुर-गोंदिया द्रुतगती महामार्ग की लंबाई 162.577 किलोमीटर होगी। इस परियोजना का प्रत्यक्ष निर्माण खर्च 8,033.37 करोड़ रुपये है, जबकि जीएसटी समेत कुल परियोजना खर्च 12,878.24 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। इस परियोजना के लिए 20 वर्ष की अवधि का 10,140 करोड़ रुपये का कर्ज और सरकार की ओर से 4,552.01 करोड़ रुपये के भागभांडवल को मंजूरी दी गई है।
नागपुर-चंद्रपुर महामार्ग पर 16 हजार करोड़ से ज्यादा
नागपुर-चंद्रपुर महामार्ग की संशोधित लंबाई 204.799 किलोमीटर है। इसका प्रत्यक्ष निर्माण खर्च 8,223.59 करोड़ रुपये है। विभिन्न अनुषंगिक खर्च और जीएसटी को मिलाकर परियोजना के लिए 16,354.55 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के लिए 20 वर्ष की अवधि का कर्ज और 4,725.26 करोड़ रुपये के भागभांडवल को भी मंजूरी दी गई है।
भंडारा-गडचिरोली मार्ग से बदलेगी कनेक्टिविटी
भंडारा-गडचिरोली प्रवेश नियंत्रित द्रुतगती महामार्ग की लंबाई 94.241 किलोमीटर होगी। इस परियोजना का प्रत्यक्ष निर्माण खर्च 5,995 करोड़ रुपये है, जबकि कुल 9,610.63 करोड़ रुपये के निधि को प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इसके अलावा गडचिरोली जिले में नवेगांव-कोनसरी-मूलचेरा-हेदरी से सूरजागड तक के मार्ग के लिए 3,154.99 करोड़ रुपये के निधि को मंजूरी दी गई है।
तीन बड़ी परियोजनाओं के लिए अलग-अलग एसपीवी
नागपुर-गोंदिया और नागपुर-चंद्रपुर समेत प्रमुख परियोजनाएं महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (MSRDC) के माध्यम से संचालित की जाएंगी। प्रत्येक महामार्ग के लिए 24 वर्ष का सवलत कालावधि मंजूर किया गया है, जिसमें तीन वर्ष का निर्माण काल शामिल है। परियोजनाओं के लिए अलग-अलग विशेष उद्देश्य वाहन यानी एसपीवी भी स्थापित किए गए हैं। इनमें नागपुर-गोंदिया के लिए ‘एमएसआरडीसी नागपुर-गोंदिया लिमिटेड’, नागपुर-चंद्रपुर के लिए ‘एमएसआरडीसी नागपुर-चंद्रपुर लिमिटेड’ और भंडारा-गडचिरोली के लिए ‘एमएसआरडीसी भंडारा-गडचिरोली लिमिटेड’ शामिल हैं।
सिर्फ सड़क नहीं, पूरे क्षेत्र की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद
पूर्व विदर्भ का बड़ा हिस्सा कृषि और खनिज संसाधनों के लिए जाना जाता है। ऐसे में बेहतर सड़क संपर्क का सीधा असर यहां से होने वाली माल ढुलाई पर पड़ सकता है। किसानों की उपज बाजारों तक पहुंचाने, खनिजों की आवाजाही आसान करने और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में इन मार्गों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
खासकर गडचिरोली जैसे क्षेत्रों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी का मतलब मुख्य शहरों और बाजारों तक आसान पहुंच भी है। नए उद्योग आने और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद भी इन परियोजनाओं से जुड़ी हुई है। यानी आने वाले समय में ये सड़कें सिर्फ नागपुर को दूसरे जिलों से नहीं जोड़ेंगी, बल्कि पूर्व विदर्भ के विकास, कारोबार और रोजमर्रा की आवाजाही को भी नई गति देने का रास्ता खोल सकती हैं।


