पुणे : पुणे जिले में हुई भारी बारिश और बाढ़ ने ग्रामीण इलाकों की सड़क व्यवस्था को बड़ा झटका दिया है। अतिवृष्टि के कारण जिला परिषद के निर्माण विभाग के अंतर्गत आने वाली 166.11 किलोमीटर सड़कें और 107 पुल-मोरियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनकी मरम्मत के लिए प्रशासन ने सरकार से 68 करोड़ 26 लाख रुपये के फंड की मांग की है।
इसमें सड़कों की मरम्मत के लिए 49 करोड़ 16 लाख रुपये, जबकि पुल और मोरियों की मरम्मत के लिए 19 करोड़ 10 लाख रुपये की आवश्यकता बताई गई है। निर्माण सभापति दीपाली हुलवळे ने यह जानकारी दी।
सात तालुकों में बारिश का सबसे ज्यादा असर
पुणे जिले के भोर, मुलशी, वेल्हे, मावल, खेड़, आंबेगांव और जुन्नर तालुकों में अतिवृष्टि का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। पहाड़ी और घाट क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण कई जगह सड़कों का कटाव हुआ, सड़कें खराब हुईं और पानी बहने से आवागमन प्रभावित हुआ। वहीं कई पुल और मोरियां भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।
मुलशी में 65 KM से ज्यादा सड़कें खराब
नुकसान के आंकड़ों में मुलशी तालुका सबसे आगे है। यहां 65.80 किलोमीटर सड़कें और 22 पुल-मोरियां प्रभावित हुई हैं। इनकी मरम्मत के लिए 17.65 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
खेड़ तालुका में 33.83 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जबकि यहां सबसे ज्यादा 30 पुल-मोरियों को नुकसान पहुंचा है। खेड़ के लिए 23 करोड़ रुपये के फंड की मांग की गई है।
वहीं भोर में 19.66 किलोमीटर सड़कें और 3 पुल-मोरियां, वेल्हे में 3.72 किलोमीटर सड़कें और 20 पुल-मोरियां प्रभावित हुई हैं। इनके लिए क्रमशः 10.75 करोड़ और 3.25 करोड़ रुपये की जरूरत बताई गई है।
मावल में 15 किलोमीटर सड़कें और 2 पुल-मोरियां, जबकि आंबेगांव में 12.70 किलोमीटर सड़कें और 8 पुल-मोरियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनके लिए 2.50 करोड़ और 4.81 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
इसी तरह जुन्नर में 15.40 किलोमीटर सड़कें और 22 पुल-मोरियां प्रभावित हुई हैं। यहां मरम्मत कार्यों के लिए 6.30 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
4,870 KM से ज्यादा सड़कें, लेकिन 166 KM को नुकसान
इन सात तालुकों में जिला परिषद के अंतर्गत आने वाली सड़कों की कुल लंबाई 4,870.31 किलोमीटर है। इनमें से 166.11 किलोमीटर सड़कें अतिवृष्टि के कारण क्षतिग्रस्त हुई हैं। अब इन सड़कों और पुलों की मरम्मत के लिए सरकार से मिलने वाले फंड पर नजर है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें और पुल रोजाना की आवाजाही का प्रमुख जरिया हैं। ऐसे में समय पर मरम्मत नहीं होने पर आने वाले दिनों में स्थानीय लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है।


