पालघर : समुद्र में मछली पकड़ते समय अनजाने में पाकिस्तान की समुद्री सीमा में प्रवेश करने के कारण पालघर जिले के 19 मछुआरे पिछले चार से पांच वर्षों से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। घर का कमाने वाला सदस्य लंबे समय से दूर होने के कारण इन मछुआरों के परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में राज्य सरकार ने उनके परिवारों को आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है।
राज्य सरकार की ओर से इन परिवारों को 89 दिनों के लिए प्रतिदिन 300 रुपये के हिसाब से कुल 26 हजार 700 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। तलासरी और डहाणू तालुका के 18 मछुआरों के परिवारों के साथ पालघर तालुका के एक मछुआरे के परिवार को भी इस सहायता का लाभ मिलेगा। पालघर जिले के डहाणू और तलासरी तालुका के कई मछुआरे गुजरात के मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों से समुद्र में जाने वाली नौकाओं पर खलासी के तौर पर काम करते हैं। गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के दौरान कई बार समुद्री सीमा का सही अंदाजा नहीं लग पाता और मछुआरे अनजाने में पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं। इसके बाद पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां नौका के साथ मछुआरों को भी हिरासत में ले लेती हैं।
इन मछुआरों के लंबे समय तक जेल में रहने का सीधा असर उनके परिवारों पर पड़ता है। घर का कमाने वाला व्यक्ति वर्षों तक वापस नहीं लौटता, जिससे परिवार के रोजमर्रा के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सरकार की आर्थिक मदद परिवारों के लिए कुछ राहत जरूर लेकर आई है।
आर्थिक मदद से ज्यादा घर वापसी की आस
हालांकि, आर्थिक सहायता मिलने के बाद भी परिवारों की चिंता खत्म नहीं हुई है। परिजनों की सबसे बड़ी मांग है कि पाकिस्तान की जेल में बंद 19 मछुआरों को जल्द से जल्द रिहा कर सुरक्षित भारत वापस लाया जाए। परिवारों का कहना है कि पैसों से ज्यादा उन्हें अपने अपनों की सुरक्षित घर वापसी का इंतजार है। कई सालों से परिवार अपने मछुआरों के लौटने की राह देख रहे हैं। बताया गया है कि भारत की हिरासत में भी 53 पाकिस्तानी मछुआरे हैं। ऐसे में मछुआरा संगठनों ने दोनों देशों से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और द्विपक्षीय समझौतों का सम्मान करते हुए सजा पूरी कर चुके कैदियों को जल्द रिहा कर अपने-अपने देश भेजने की मांग की है।
समुद्र में अनजाने में सीमा पार करने की एक गलती इन मछुआरों और उनके परिवारों के लिए वर्षों की परेशानी बन गई है। राज्य सरकार की आर्थिक मदद निश्चित रूप से परिवारों के लिए राहत है, लेकिन इन परिवारों की असली खुशी उस दिन होगी, जब उनके अपने लोग सुरक्षित घर लौटेंगे।


