मोहन जाधव (प्रतिनिधी) : 12 वर्षों बाद गोदावरी तट पर होने जा रहा नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा अवसर है। ऐसा कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं स्वदेशी व्यापारी मंच के राष्ट्रीय संयोजक बालकृष्ण भरतिया ने कहा। बालकृष्ण भरतिया ने कहा कि राजा चंद्रगुप्त मौर्य के दौर में मेले और तीर्थ भारत के व्यापार के प्रमुख केंद्र हुआ करते थे। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी मेले और उत्सवों को व्यापार एवं रोजगार का आधार माना गया है। इसी प्राचीन आर्थिक मॉडल के संदर्भ में कुंभ मेले के आर्थिक महत्व को समझाने के लिए कैट और स्वदेशी व्यापारी मंच की ओर से प्रवास यात्रा की जा रही है। इस दौरान नासिक और आसपास के गांवों के व्यापारियों को कुंभ मेले से मिलने वाले आर्थिक अवसरों की जानकारी दी जा रही है।
भरतिया ने कहा कि कुंभ मेले से पहले स्थानीय स्तर पर वस्तुओं का उत्पादन और कृषि उपज की उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी जरूरी है। खेतों में भुट्टे, मक्का, सलाद की सब्जियां, फल, फूल और पत्तों की पर्याप्त व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि मेले के दौरान बढ़ने वाली मांग का लाभ स्थानीय किसानों और व्यापारियों को मिल सके। कुंभ मेले में देशभर से करोड़ों श्रद्धालुओं के नासिक आने की संभावना है। इसके लिए सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर अस्थायी आर्थिक गतिविधियों का केंद्र विकसित किया जाएगा। प्रयागराज में कुंभ के दौरान लगभग 2,000 से 3,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक की अर्थव्यवस्था उत्पन्न होने का अनुमान बताया जाता है। इसी तरह नासिक सिंहस्थ कुंभ में भी बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष व्यापार की संभावनाएं हैं।
किसानों और छोटे व्यापारियों को मिलेगा लाभ
भरतिया के अनुसार, नासिक के गोदावरी तट के किसानों को अपने फूल, फल और सब्जियां सीधे बाजार में बेचने का अवसर मिलेगा। इससे किसानों और कृषि क्षेत्र को आर्थिक लाभ हो सकता है। देश-विदेश से श्रद्धालुओं के आने पर पैठणी साड़ियों, त्र्यंबक की रुद्राक्ष मालाओं, तांबे-पीतल के बर्तनों और पूजा सामग्री का कारोबार भी बढ़ सकता है। इसके साथ ही होटल, लॉज, परिवहन, ऑटो, टैक्सी, टेंट और स्टॉल संचालकों को व्यापार के नए अवसर मिलेंगे। सुरक्षा, स्वच्छता, डिजिटल सेवाओं और फोटोग्राफी जैसे क्षेत्रों में भी स्थानीय युवाओं के लिए अस्थायी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
लोकल गो ग्लोबल’ को मिलेगा बढ़ावा
भरतिया ने कहा कि कुंभ मेला नासिक के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का सुनहरा अवसर है। नासिक के अंगूर, वाइन, पाव-मिसल और त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी पहचान को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जा सकता है।उन्होंने शासन से मांग की कि कुंभ क्षेत्र में स्थानीय उत्पादकों के लिए ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल गो ग्लोबल’ के तहत विशेष स्टॉल आरक्षित किए जाएं, ताकि इसका लाभ बड़े कॉर्पोरेट समूहों के बजाय स्थानीय व्यापारियों और स्वदेशी उत्पादों को मिले।
उन्होंने कहा कि शासन को व्यापक प्रचार-प्रसार के माध्यम से स्थानीय लोगों को कुंभ मेले की आर्थिक संभावनाओं के प्रति जागरूक करना चाहिए। किसानों को भुट्टे, मूंगफली, सलाद में उपयोग होने वाली सब्जियों और अन्य फल-सब्जियों का पर्याप्त भंडारण करना चाहिए। फरसान निर्माताओं और भड़भूंजों को भी अपने उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी करनी चाहिए। होटल और लॉज संचालकों को अतिरिक्त बिस्तर तथा अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करनी चाहिए।
भरतिया ने यह भी सुझाव दिया कि स्थानीय बैंकों को मुद्रा ऋण योजना के अंतर्गत छोटे व्यापारियों और विभिन्न व्यवसायियों को अधिक से अधिक ऋण उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि वे कुंभ मेले के दौरान बढ़ने वाली मांग का लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ कुंभ मेला केवल नासिक तक सीमित न रहकर पूरे महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था को गति देने और रोजगार के अवसर बढ़ाने का माध्यम बनना चाहिए।


