एक छोटे से गाँव में तारा नाम की एक प्यारी-सी बच्ची रहती थी। उसे आसमान में चमकते तारे देखना और चाँद से बातें करना बहुत पसंद था। हर रात वह अपनी खिड़की के पास बैठकर चाँद को निहारती और उससे अपने मन की बातें कहती।
एक रात तारा ने देखा कि चाँद कुछ उदास है। उसकी चमक भी पहले जैसी नहीं थी।
तारा ने हैरानी से पूछा, “चाँद मामा! आज आप इतने उदास क्यों हैं?”
चाँद ने धीमी आवाज में जवाब दिया, “तारा, आज मेरा एक रंग खो गया है। अब मैं पहले की तरह सुंदर नहीं दिखता। शायद इसी वजह से बच्चे मुझे देखकर खुश भी नहीं होते।”
तारा ने तुरंत कहा, “आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए। मैं आपका खोया हुआ रंग ढूँढ़कर लाऊँगी।”
यह कहकर वह अपनी छोटी-सी जादुई गुड़िया को लेकर बगीचे में पहुँची। तभी अचानक एक सुनहरी तितली उसके सामने आई।
तितली ने पूछा, “तुम इतनी रात को क्या ढूँढ़ रही हो?”
तारा ने उसे सारी बात बताई। तितली मुस्कुराई और बोली, “चाँद का रंग किसी रंग की डिब्बी में नहीं मिलेगा। उसे पाने के लिए तुम्हें दुनिया की तीन सबसे खूबसूरत चीजें ढूँढ़नी होंगी।”
तारा ने पूछा, “वो कौन-सी चीजें हैं?”
तितली बोली, “किसी की सच्ची मुस्कान, किसी का निस्वार्थ प्यार और किसी की मदद करने वाला दिल।”
तारा अपनी खोज में निकल पड़ी।
सबसे पहले उसे रास्ते में एक छोटा बच्चा मिला, जो अपना खिलौना टूट जाने के कारण रो रहा था। तारा ने उसे अपनी पसंदीदा गुड़िया खेलने के लिए दे दी। खिलौना पाकर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
आगे बढ़ने पर उसे एक बूढ़ी दादी दिखाई दीं, जो अकेली बैठी थीं। तारा उनके पास गई और कुछ देर उनके साथ बातें करने लगी। दादी ने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा और उसे गले लगा लिया।
थोड़ी दूर पर एक घायल चिड़िया जमीन पर पड़ी थी। तारा ने उसे सावधानी से उठाया, पानी पिलाया और सुरक्षित जगह पर रख दिया।
अचानक आसमान में तेज रोशनी फैल गई। सुनहरी तितली फिर से उसके सामने आ गई।
उसने कहा, “तारा, तुमने चाँद का खोया हुआ रंग ढूँढ़ लिया है।”
तारा हैरान होकर बोली, “लेकिन मुझे तो कहीं कोई रंग मिला ही नहीं!”
तितली हँसकर बोली, “तुम्हारी दया, तुम्हारा प्यार और तुम्हारी मुस्कान ही चाँद के असली रंग हैं।”
इतना सुनते ही आसमान में चाँद फिर से चमकने लगा। उसकी रोशनी पहले से भी ज्यादा खूबसूरत थी।
चाँद ने तारा से कहा, “धन्यवाद मेरी प्यारी दोस्त! आज तुमने मुझे सिखाया कि असली खूबसूरती चेहरे या रंग में नहीं, बल्कि अच्छे दिल में होती है।”
तारा मुस्कुराई और अपनी खिड़की के पास लौट आई।
उस रात उसे समझ आया कि दुनिया को खूबसूरत बनाने के लिए जादू की जरूरत नहीं होती, बस थोड़ा-सा प्यार और दूसरों की मदद करने का जज्बा होना चाहिए।
कहानी से सीख
सच्ची खूबसूरती हमारे चेहरे या रंग में नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार, दया और दूसरों के प्रति प्यार में छिपी होती है।


