नई दिल्ली : प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी आज कई परिवारों के लिए सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि बड़ा आर्थिक खर्च भी बन गई है। महंगे कोचिंग संस्थानों की फीस के कारण गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर बढ़ते दबाव का मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से उठाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोचिंग की बढ़ती प्रतिस्पर्धा मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आर्थिक बोझ बन गई है। कई माता-पिता को लगता है कि अगर उनका बच्चा कोचिंग नहीं करता, तो वह पीछे रह जाएगा। इसी चिंता को देखते हुए सरकार युवाओं के लिए विभिन्न परीक्षाओं की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था करने जा रही है। मोदी ने कहा कि देश के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का हजारों रुपये का खर्च बचना चाहिए। साथ ही बच्चे अपने परिवार के आसपास रहकर पढ़ाई कर सकें और माता-पिता पर आर्थिक दबाव भी न पड़े। इसके लिए डिजिटल सुविधाओं और देश के गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों को एक मंच पर लाकर देशभर में मुफ्त कोचिंग का नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
पढ़ाई के साथ AI स्किल पर भी जोर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते महत्व का भी जिक्र किया। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले एक साल में देश के 1 करोड़ युवाओं को AI कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मोदी ने कहा कि आने वाले समय में भारत में कई बड़े डेटा सेंटर स्थापित होंगे, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने विशाखापट्टनम में Google के डेटा सेंटर और गुजरात में Meta तथा Reliance के प्रस्तावित डेटा सेंटर का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री की इस घोषणा से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके परिवारों को महंगे कोचिंग खर्च से राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर छोटे शहरों और मध्यमवर्गीय परिवारों के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।


