मुंबई : टाटा समूह और शापूरजी पालोनजी (SP) समूह के बीच लंबे समय से चले आ रहे कारोबारी विवाद को खत्म करने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ती नजर आ रही है। टाटा सन्स में SP समूह की करीब 18.4% हिस्सेदारी को लेकर दोनों पक्ष कई विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें टाटा की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों के बदले टाटा सन्स की हिस्सेदारी देने का विकल्प भी शामिल है।
SP समूह पर बड़े कर्ज का दबाव है। ऐसे में टाटा सन्स में मौजूद हिस्सेदारी को नकदी या आसानी से बिकने वाली संपत्तियों में बदलना समूह के लिए अहम हो सकता है। आने वाले समय में इस हिस्सेदारी को लेकर कोई बड़ा फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या है शेयर स्वैप का विकल्प ?
बातचीत में एक प्रमुख विकल्प शेयर स्वैप का है। इसके तहत SP समूह टाटा सन्स में अपनी कुछ या पूरी हिस्सेदारी के बदले टाटा समूह की लिस्टेड कंपनियों के शेयर ले सकता है। इसमें टाटा पावर जैसी कंपनियों के शेयर शामिल होने की संभावना बताई जा रही है। ऐसा होने पर SP समूह को अपनी टाटा सन्स की हिस्सेदारी को अपेक्षाकृत ज्यादा लिक्विड एसेट्स में बदलने में मदद मिल सकती है।
दो अन्य विकल्पों पर भी नजर
शेयर स्वैप के अलावा दो और विकल्पों पर चर्चा हो रही है।
पहला विकल्प : टाटा सन्स खुद SP समूह की हिस्सेदारी खरीद सकता है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बैंकों से फंडिंग या क्रेडिट सुविधाओं का सहारा लिया जा सकता है।
दूसरा विकल्प : SP समूह अपनी हिस्सेदारी किसी बाहरी निवेशक को बेच सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इस स्थिति में किसी बड़े वैश्विक निवेशक को प्राथमिकता दी जा सकती है।
सबसे बड़ी चुनौती होगी वैल्यूएशन
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल टाटा सन्स की सही वैल्यूएशन का है। टाटा सन्स के पास एयर इंडिया और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी बड़ी अनलिस्टेड संपत्तियां हैं। इसलिए दोनों पक्षों के बीच हिस्सेदारी की कीमत तय करना आसान नहीं होगा। इसके अलावा, यदि शेयर स्वैप का रास्ता अपनाया जाता है तो टाटा की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों के ट्रांसफर से जुड़े कानूनी और नियामकीय नियमों का भी ध्यान रखना होगा। दोनों पक्षों के सलाहकार इन पहलुओं की समीक्षा कर रहे हैं।
SP Group पर कर्ज का दबाव
SP समूह के लिए यह मामला सिर्फ कारोबारी विवाद तक सीमित नहीं है। समूह पर कर्ज का दबाव भी है। हालिया बॉन्ड इश्यू के तहत पहला ब्याज भुगतान जुलाई 2028 में होना है। ऐसे में अगले करीब 18 महीनों में टाटा सन्स की हिस्सेदारी को लेकर समाधान निकालना समूह के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यानी यह हिस्सेदारी SP समूह के लिए सिर्फ एक निवेश नहीं, बल्कि कर्ज प्रबंधन और भविष्य की वित्तीय रणनीति का भी बड़ा हिस्सा बन चुकी है।
Noel Tata की भूमिका क्यों अहम?
इस पूरी बातचीत में नोएल टाटा की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष हैं और टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा सन्स में करीब 66% हिस्सेदारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नोएल टाटा के प्रतिनिधि इस समझौते को लेकर चल रही बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं। टाटा सन्स के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के फरवरी में पद छोड़ने के फैसले के बाद यह मामला और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
कारोबारी विवाद के पीछे है पारिवारिक रिश्ता भी
टाटा और मिस्त्री परिवारों के बीच रिश्ता केवल कारोबार तक सीमित नहीं है। दोनों परिवारों के बीच पारिवारिक संबंध भी हैं। नोएल टाटा की शादी आलू मिस्त्री से हुई है, जो SP समूह के चेयरमैन शापूर मिस्त्री की बहन हैं। ऐसे में टाटा सन्स में SP समूह की हिस्सेदारी का यह मामला कारोबारी होने के साथ-साथ दो बड़े कारोबारी परिवारों के रिश्तों से भी जुड़ा हुआ है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल शेयर स्वैप, टाटा सन्स द्वारा हिस्सेदारी की खरीद और किसी बाहरी वैश्विक निवेशक को हिस्सेदारी बेचने जैसे विकल्पों पर चर्चा चल रही है। अंतिम फैसला वैल्यूएशन, फंडिंग, कानूनी प्रक्रियाओं और नियामकीय मंजूरी जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करेगा। अगर दोनों पक्ष किसी समाधान पर पहुंचते हैं, तो इससे टाटा समूह और SP समूह के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खत्म करने का रास्ता साफ हो सकता है।


