एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने एक बार फिर देश को गर्व करने का मौका दिया। जापान के आइची-नागोया में हुए इन खेलों में भारत ने कुल 85 पदक अपने नाम किए। इनमें 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसी के साथ भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया भारत से आगे रहे। खास बात यह रही कि भारत और उज्बेकिस्तान दोनों के खाते में 21-21 गोल्ड आए, लेकिन ज्यादा सिल्वर मेडल के कारण भारत ने चौथा स्थान हासिल किया।
भारत का यह एशियन गेम्स में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा पदक प्रदर्शन रहा। इससे पहले 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने रिकॉर्ड 106 पदक जीते थे। इस बार भी भारतीय खिलाड़ियों ने कई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए नए रिकॉर्ड बनाए और कई ऐसे पदक जीते, जिनका देश लंबे समय से इंतजार कर रहा था।
तीरंदाजी में भारत का शानदार दबदबा
तीरंदाजी भारत के लिए सबसे सफल खेलों में शामिल रही। भारत ने यहां कुल 9 पदक, जिसमें 5 गोल्ड शामिल हैं, जीते। भारतीय टीम ने कंपाउंड की तीनों टीम स्पर्धाओं में गोल्ड हासिल किया। चिकिता तनिपर्थी और साहिल जाधव की मिश्रित टीम ने भी गोल्ड जीतकर शानदार प्रदर्शन किया। रिकर्व में भी भारत ने सभी पांच स्पर्धाओं में पदक जीते। कुमकुम मोहोड ने महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा।
गोल्फ में भी आया ऐतिहासिक पल
गोल्फ में प्रणवी उर्स ने भारतीय खेल इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया। उन्होंने महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड जीतकर एशियन गेम्स में यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बनने का गौरव हासिल किया। इसके बाद प्रणवी उर्स, अदिति अशोक और दीक्षा डागर की टीम ने महिला टीम स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता।
शूटिंग में भी यादगार प्रदर्शन
भारतीय निशानेबाजों ने भी कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। सुरुचि सिंह और कमलजीत ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में गोल्ड जीतकर भारत को इस स्पर्धा का पहला एशियन गेम्स गोल्ड दिलाया। वहीं नीरू धांडा ने महिला ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड जीतकर एशियन गेम्स में शॉटगन गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनने का इतिहास रचा। नीरू धांडा का प्रदर्शन खास रहा। उन्होंने कुल तीन पदक जीते और दो गोल्ड के साथ एक सिल्वर अपने नाम किया।
एथलेटिक्स बना भारत का सबसे बड़ा पदक स्रोत
भारत को सबसे ज्यादा 24 पदक एथलेटिक्स से मिले। हालांकि इस खेल में भारत को सिर्फ एक गोल्ड मिला, लेकिन कई खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। विथ्या रामराज ने महिला 400 मीटर बाधा दौड़ में पीटी उषा का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा। उन्होंने महिला और मिश्रित 4×400 मीटर रिले में भी पदक जीते। गुलवीर सिंह ने 10,000 मीटर और 1,500 मीटर में सिल्वर और 5,000 मीटर में ब्रॉन्ज जीतकर तीन पदक अपने नाम किए। वहीं बारानिका एलंगोवन ने पोल वॉल्ट में ब्रॉन्ज जीतकर एशियन गेम्स में भारत के लिए इस स्पर्धा का पहला पदक हासिल किया। सावन बरवाल ने राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ मैराथन में सिल्वर जीता।
मीराबाई चानू ने खत्म किया लंबा इंतजार
वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने महिला 48 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता। यह एशियन गेम्स में उनका पहला पदक रहा। साथ ही यह 1998 के बैंकॉक एशियन गेम्स के बाद वेटलिफ्टिंग में भारत का पहला पदक भी रहा।
नए खेलों में भी भारत ने छोड़ी छाप
भारत ने उन खेलों में भी इतिहास बनाया, जहां अब तक पदक का इंतजार था। सुचिका तारियाल ने MMA में ब्रॉन्ज जीतकर भारत का इस खेल में पहला एशियन गेम्स पदक हासिल किया। रोइंग में सतनाम सिंह और सलमान खान ने पुरुष डबल स्कल्स में ब्रॉन्ज जीतकर इस स्पर्धा में भारत का पहला पदक जीता। वहीं रोशिबिना देवी ने वुशु में सिल्वर जीतकर लगातार तीन एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनने की उपलब्धि हासिल की। सेपकटकरॉ के पुरुष क्वाड्रेंट में भारत ने ऐतिहासिक ब्रॉन्ज जीतकर इस खेल में अपना पहला पदक हासिल किया।
हॉकी और कबड्डी में भी भारत का दबदबा
टीम खेलों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय महिला हॉकी टीम ने 1982 के बाद पहली बार एशियन गेम्स का खिताब जीता। पुरुष हॉकी टीम ने भी अपना खिताब बरकरार रखा। दोनों टीमों की जीत के साथ भारत ने लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालिफिकेशन हासिल किया। कबड्डी में भारत ने पुरुष और महिला दोनों वर्गों के गोल्ड मेडल बरकरार रखे। क्रिकेट में भी भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने गोल्ड मेडल जीता।
बॉक्सिंग में तीन गोल्ड
बॉक्सिंग में भारत ने कुल तीन गोल्ड जीते। यह एशियन गेम्स में भारत का बॉक्सिंग में सबसे सफल प्रदर्शन रहा। लवलीना बोरगोहेन ने गोल्ड जीतकर मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स बॉक्सिंग में गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बनने की उपलब्धि हासिल की।
कुश्ती में भी शानदार वापसी
कुश्ती में भारत ने कुल छह पदक जीते। अमन सहरावत और सुजीत कलकल ने गोल्ड मेडल हासिल किया। यह 1962 के बाद कुश्ती में भारत का सबसे अच्छा एशियन गेम्स प्रदर्शन रहा। स्क्वैश में अनाहत सिंह ने महिला सिंगल्स में सिल्वर जीतकर इतिहास बनाया। वह एशियन गेम्स सिंगल्स में सिल्वर जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। टेबल टेनिस में मानुष शाह और दिया चिताले ने मिश्रित युगल में ब्रॉन्ज जीता, जो एशियन गेम्स के इतिहास में भारत का इस खेल में केवल चौथा पदक रहा।
चार खिलाड़ियों ने जीते तीन-तीन पदक
एशियन गेम्स 2026 में चार भारतीय खिलाड़ियों ने तीन-तीन पदक जीतकर खास पहचान बनाई। नीरू धांडा और कुमकुम मोहोड ने दो गोल्ड और एक सिल्वर जीता। गुलवीर सिंह ने दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज हासिल किया। वहीं विथ्या रामराज ने महिला 4×400 मीटर रिले में गोल्ड, मिश्रित 4×400 मीटर रिले में सिल्वर और 400 मीटर बाधा दौड़ में ब्रॉन्ज जीता।
कुल मिलाकर, 85 पदकों के साथ भारत का यह अभियान सिर्फ पदकों की संख्या तक सीमित नहीं रहा। कई खिलाड़ियों ने पहली बार इतिहास रचा, कई ने पुराने रिकॉर्ड तोड़े और कई खेलों में भारत ने अपनी स्थिति मजबूत की। एशियन गेम्स 2026 ने एक बार फिर दिखाया कि भारतीय खेलों में अब सिर्फ बड़े नाम ही नहीं, बल्कि नए चेहरे भी देश के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।


