अमरावती जिला महिला अस्पताल में आग : तीन नवजातों की मौत, 7 सदस्यीय समिति करेगी जांच

स्वास्थ्य मंत्री ने किया घटनास्थल का निरीक्षण; 8 दिन में रिपोर्ट, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई का आदेश

अमरावती :  अमरावती के जिला महिला अस्पताल में आग लगने से तीन नवजात बच्चों की झुलसकर मौत की दर्दनाक घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। मासूम बच्चों की मौत के बाद अब अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और आग लगने के कारणों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने घटनास्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। इसके बाद आयोजित पत्रकार परिषद में उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच में यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी या ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है, तो किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

7 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित

घटना की तकनीकी और प्रशासनिक जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त संजय काटकर की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। समिति में एम्स के प्रतिनिधि, डीएमईआर के विशेषज्ञ, महावितरण के मुख्य विद्युत अभियंता और फायर सेफ्टी विशेषज्ञ शामिल हैं। समिति अस्पताल की मशीनरी, विद्युत व्यवस्था, फायर सेफ्टी सिस्टम और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच करेगी। आठ दिनों के भीतर सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

वेंटिलेटर की जांच भी होगी

जानकारी के अनुसार, जिस वेंटिलेटर से संबंधित सवाल उठ रहे हैं, वह अभी वारंटी अवधि में था और 6 अगस्त को कंपनी की ओर से उसका निरीक्षण भी किया गया था। इसके बावजूद हादसा कैसे हुआ, इसकी तकनीकी जांच की जाएगी। इसके साथ ही आग लगने के समय सायरन बजा था या नहीं, स्प्रिंकलर और फायर फॉग सिस्टम काम कर रहे थे या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। उपकरणों की आपूर्ति और ठेकेदारों की नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई थी या नहीं, यह भी समिति की जांच के दायरे में रहेगा।

दोषी ठेकेदारों पर होगी कार्रवाई

स्वास्थ्य मंत्री ने साफ किया कि यदि जांच में घटिया उपकरण, लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आया, तो संबंधित ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गंभीर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। तीन नवजातों की मौत से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अब परिजनों के साथ-साथ शहरवासियों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों पर वास्तव में क्या कार्रवाई होती है।

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