मुंबई : महाराष्ट्र सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में महाराष्ट्र के पूर्व अग्निवीरों को सरकारी और अर्ध-सरकारी सेवाओं में अवसर देने के लिए नीति तय करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत गुट-क की वर्दीधारी सरकारी सेवाओं की भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को 10 प्रतिशत समानांतर आरक्षण दिया जाएगा।
इस फैसले का फायदा महाराष्ट्र के निवासी उन पूर्व अग्निवीरों को मिलेगा, जिन्होंने अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी की है। खास बात यह है कि पूर्व अग्निवीरों के लिए यह आरक्षण सामाजिक आरक्षण से अलग समानांतर व्यवस्था के रूप में लागू होगा।
पुलिस समेत कई विभागों में मिलेगा मौका
सरकार के फैसले के अनुसार पूर्व अग्निवीरों को पुलिस, कारागार, नागरिक सुरक्षा, होमगार्ड, राज्य गुप्तवार्ता विभाग, राज्य उत्पादन शुल्क, वन विभाग और महानगरपालिकाओं में वर्दीधारी गुट-क पदों पर भर्ती का अवसर दिया जाएगा। अग्निशामक विमोचक और अग्निशामक जैसे पदों के लिए होने वाली लिखित परीक्षा से भी पूर्व अग्निवीरों को पूरी तरह छूट देने का निर्णय लिया गया है। यानी जिन युवाओं ने सेना में चार साल की सेवा पूरी की है, उन्हें दोबारा लिखित परीक्षा की प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा।
उम्र में चार साल की छूट, ट्रेनिंग की भी जरूरत नहीं
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि पूर्व अग्निवीरों को संबंधित पदों के लिए उम्र में चार साल की छूट दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अग्निवीर पहले ही परीक्षा और प्रशिक्षण से गुजर चुके हैं, इसलिए उन्हें दोबारा परीक्षा या ट्रेनिंग की शर्त नहीं रखी जाएगी। इसके अलावा शारीरिक कार्यक्षमता चाचणी (PET), शारीरिक मानक चाचणी (PST), वरिष्ठता, पदोन्नति, प्रशिक्षण, अनुभव और कौशल से जुड़ी विस्तृत शर्तें शासन निर्णय के माध्यम से तय की जाएंगी।
जरूरत पड़ी तो बढ़ाई जा सकती हैं पदों की संख्या
मुख्यमंत्री के अनुसार, अगर उपलब्ध पद पूर्व अग्निवीरों की संख्या के मुकाबले कम पड़ते हैं, तो जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पद भरने का निर्णय लिया जा सकता है। इसके अलावा विशेष बाब के रूप में कोस्टल सिक्योरिटी में भी पूर्व अग्निवीरों को अवसर देने की बात कही गई है। चार साल सेना में सेवा देने के बाद वापस आने वाले इन युवाओं के अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, तकनीकी कौशल और प्रशिक्षण को देखते हुए उन्हें राज्य की वर्दीधारी सेवाओं में शामिल करने की दिशा में यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


