बेंगलुरु : अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण को लेकर कर्नाटक में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। हाईकोर्ट द्वारा आरक्षण में की गई बढ़ोतरी रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस संबंध में विशेष अपील दाखिल करने पर सहमति बनी। इस फैसले के बाद अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी है। सरकार आरक्षण बढ़ोतरी को लेकर आगे कौन-से विकल्प अपनाती है और इस मामले में क्या रास्ता निकलता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
आखिर क्या है पूरा मामला?
कर्नाटक में पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अनुसूचित जाति का आरक्षण 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति का आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत किया था। इस बढ़ोतरी के बाद राज्य में कुल आरक्षण का प्रतिशत 56 हो गया था।
हालांकि, आरक्षण बढ़ाने के इस फैसले को कुछ लोगों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने आरक्षण बढ़ोतरी के आदेश को रद्द कर दिया। इस फैसले से आरक्षण बढ़ोतरी पर कानूनी सवाल खड़े हो गए। अब राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है। ऐसे में आरक्षण बढ़ोतरी का मुद्दा एक बार फिर कानूनी प्रक्रिया के केंद्र में आ गया है।
आरक्षण को लेकर आगे क्या करेगी सरकार?
सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने के साथ ही सरकार आरक्षण बढ़ोतरी को लेकर दूसरे कानूनी विकल्पों पर भी विचार करेगी। मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राजनीतिक मामलों की समिति में इस विषय पर चर्चा की जाएगी। आरक्षण बढ़ोतरी को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने, सरकारी भर्तियों पर पड़ने वाले प्रभाव और केंद्र सरकार के सामने आगे की मांग रखने जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि, इन विकल्पों पर चर्चा के बाद ही सरकार का अगला कदम स्पष्ट होगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित अपील इस मामले में सरकार की अहम रणनीति मानी जा रही है।
कैबिनेट के अन्य फैसले भी अहम
आरक्षण के मुद्दे के अलावा कर्नाटक मंत्रिमंडल की बैठक में कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।
मैसूर के पास बनेगी फिल्म सिटी
सांस्कृतिक नगरी मैसूर के पास हिम्मावू क्षेत्र में लगभग 160 एकड़ जमीन पर फिल्म सिटी बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के लिए 729.43 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे क्षेत्र में फिल्म निर्माण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
तुंगा नदी पर बनेगा बांध
चिक्कमगलूर जिले के श्रृंगेरी तालुका में श्री शारदांबा मठ के पास बहने वाली तुंगा नदी पर बांध बनाने के काम को प्रशासनिक मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर लगभग 83.40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें
कर्नाटक में SC-ST आरक्षण बढ़ोतरी का मामला अब अगले कानूनी चरण में पहुंचने जा रहा है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने का रास्ता चुना है, लेकिन आरक्षण बढ़ोतरी को लेकर अंतिम स्थिति क्या होगी, यह आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार की अपील के बाद आरक्षण बढ़ोतरी को लेकर कोई नया रास्ता निकलेगा? इसका जवाब आने वाले समय में सामने आएगा।


