नई दिल्ली : NEET-UG परीक्षा में दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। एक विशेष रूप से सक्षम उम्मीदवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पहचान की पुष्टि के लिए वैकल्पिक तरीकों की संभावना पर विचार करने का फैसला किया है।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने मामले में अंतरिम राहत के मुद्दे पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पक्ष रखा।
इस साल दोबारा NEET-UG में बैठने की मिली अनुमति
सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता को इस वर्ष आयोजित दोबारा NEET-UG परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी गई थी। इसके चलते कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत पर कोई आदेश पारित नहीं किया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पहचान सत्यापन के लिए वैकल्पिक तरीकों से जुड़े बड़े और महत्वपूर्ण मुद्दे को अभी लंबित रखा है। कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता से इस मामले में उसकी सहायता करने को भी कहा है।
21 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस याचिका में विचार के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए हैं। इसलिए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन से अदालत की सहायता करने का अनुरोध किया गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी। इस सुनवाई में दिव्यांग उम्मीदवारों की पहचान सत्यापन प्रक्रिया को अधिक सुगम और वैकल्पिक बनाने से जुड़े मुद्दे पर आगे विचार होने की उम्मीद है।
दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए क्यों अहम है मामला?
परीक्षाओं में पहचान सत्यापन की प्रक्रिया उम्मीदवारों की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए जरूरी होती है। लेकिन दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए ऐसी प्रक्रियाओं में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ सकती हैं। ऐसे में वैकल्पिक सत्यापन तरीकों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई परीक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।


