पुणे : महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की संयुक्त ग्रुप-B मुख्य परीक्षा में सफल हुए उम्मीदवारों ने राज्य सरकार से परीक्षा को सरसरी तौर पर रद्द नहीं करने की मांग की है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों और संदेह के आधार पर पूरी परीक्षा रद्द करना उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर सफलता हासिल की है।
पेपर लीक के दावों और विशेष जांच दल (SIT) की जांच की आशंका के बीच नियुक्ति प्रक्रिया रुकने से सफल उम्मीदवारों की चिंता बढ़ गई है। कई अभ्यर्थियों ने कठिन परिस्थितियों में तैयारी की है। ऐसे में भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता उनके लिए मानसिक तनाव का कारण बन रही है।
758 पदों के लिए हुई थी भर्ती प्रक्रिया
MPSC ने जुलाई 2025 में संयुक्त ग्रुप-B परीक्षा के माध्यम से कुल 758 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इनमें सहायक कक्ष अधिकारी के 3, राज्य कर निरीक्षक के 279, पुलिस उपनिरीक्षक के 392 और दुय्यम निबंधक के 84 पद शामिल थे। जनवरी 2026 में प्रारंभिक परीक्षा और मई 2026 में मुख्य परीक्षा आयोजित की गई। इसके बाद अगस्त में परिणाम घोषित किया गया। दुय्यम निबंधक पद के लिए चयनित उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच 22 और 23 सितंबर को निर्धारित थी, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया। इससे नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों की चिंता और बढ़ गई है।
सोशल मीडिया पर दावों से बढ़ा असमंजस
उम्मीदवारों का आरोप है कि टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिना ठोस सबूत परीक्षा का पेपर लीक होने के दावे किए जा रहे हैं। औषधि निरीक्षक पेपर लीक मामले के आरोपियों में से कुछ के पहले की ग्रुप-B प्रारंभिक परीक्षा पास होने के संदर्भ को जोड़कर संदेह का माहौल बनाया जा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों ने लंबे समय तक मेहनत की है। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थी भी शामिल हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बीच अपनी तैयारी पूरी की। ऐसे में केवल अफवाहों के आधार पर सभी उम्मीदवारों को संदेह के घेरे में रखना उचित नहीं है।
जांच से इनकार नहीं, लेकिन निर्दोषों को सजा क्यों?
सफल उम्मीदवारों ने स्पष्ट किया है कि वे SIT की जांच के लिए तैयार हैं। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, उनकी मांग है कि जांच के नाम पर पूरी परीक्षा रद्द करने के बजाय तथ्यों और सबूतों के आधार पर निर्णय लिया जाए। अभ्यर्थियों ने यह भी मांग की है कि SIT जांच एक निश्चित समयसीमा में पूरी की जाए। यदि जांच में अधिक समय लगता है, तो संदिग्ध उम्मीदवारों को अलग रखते हुए अन्य पात्र उम्मीदवारों की नियुक्ति कानून के दायरे में की जाए।
अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई की मांग
उम्मीदवारों ने पुलिस और MPSC से टेलीग्राम तथा अन्य सोशल मीडिया माध्यमों पर जानबूझकर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है। अब सफल अभ्यर्थियों की नजर सरकार और आयोग के अगले कदम पर है। उनके लिए यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, परिवार की उम्मीदों और भविष्य से जुड़ा सवाल है। उम्मीदवार चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष हो, दोषियों को सजा मिले और जिनकी सफलता पर सवाल उठाने के लिए ठोस सबूत नहीं हैं, उनके नियुक्ति के रास्ते को बेवजह न रोका जाए।


