Jio Platforms IPO News : रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़ी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को पहले ही दिन निवेशकों का शानदार रिस्पॉन्स मिला। आईपीओ खुलने के कुछ ही समय में इसे पूरा सब्सक्रिप्शन मिल गया। संस्थागत निवेशकों की मजबूत मांग के चलते इस आईपीओ ने बाजार में खूब चर्चा बटोरी है। वहीं, ग्रे मार्केट में भी इसके प्रीमियम को लेकर निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।
100 मिनट में पूरा हुआ सब्सक्रिप्शन
21 अक्टूबर को सुबह 10:44 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ कुल 1.14 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। आईपीओ के तहत बिक्री के लिए रखे गए 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले करीब 22.58 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां मिली थीं।
हालांकि, अलग-अलग निवेशक श्रेणियों में सब्सक्रिप्शन की स्थिति अलग रही। सुबह 10:44 बजे तक खुदरा निवेशकों का हिस्सा 0.26 गुना और गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) का हिस्सा 0.28 गुना सब्सक्राइब हुआ था। वहीं, कर्मचारियों के लिए आरक्षित हिस्से को 0.61 गुना और शेयरधारकों के लिए आरक्षित हिस्से को 0.47 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। इस दौरान आईपीओ के लिए करीब 25,265 करोड़ रुपये की बोलियां लगाई गई थीं और 10.17 लाख से ज्यादा आवेदन दर्ज किए गए थे।
GMP ₹276, लिस्टिंग पर कितने मुनाफे का अनुमान?
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को लेकर ग्रे मार्केट में भी हलचल देखने को मिली। 21 अक्टूबर को सुबह 10 बजे उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 276 रुपये था। आईपीओ की ऊपरी कीमत 1,119 रुपये प्रति शेयर के आधार पर देखें, तो इस जीएमपी के हिसाब से संभावित लिस्टिंग कीमत करीब 1,395 रुपये प्रति शेयर बैठती है। यानी इश्यू प्राइस के मुकाबले लगभग 24.66 प्रतिशत प्रीमियम का अनुमान लगाया जा रहा था। हालांकि, निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम अनौपचारिक संकेत होता है। शेयर की वास्तविक लिस्टिंग कीमत इससे अलग हो सकती है। इसलिए केवल जीएमपी देखकर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है।
एंकर निवेशकों से भी जुटाई बड़ी रकम
आईपीओ खुलने से पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से करीब 8,110 करोड़ रुपये जुटाए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एंकर निवेशकों की ओर से पेशकश की गई रकम के मुकाबले करीब 30 गुना मांग दर्ज की गई थी। इससे आईपीओ को लेकर बड़े निवेशकों की दिलचस्पी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
निवेश से पहले इन जोखिमों को भी समझें
जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार का बड़ा हिस्सा उसकी दूरसंचार इकाई रिलायंस जियो इन्फोकॉम पर निर्भर है। ऐसे में दूरसंचार क्षेत्र के नियमों में बदलाव, स्पेक्ट्रम की उपलब्धता और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा कंपनी के कारोबार को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा और नेट न्यूट्रैलिटी से जुड़े नियमों में संभावित बदलाव भी कंपनी के लिए चुनौती बन सकते हैं।
कुल मिलाकर, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को पहले ही दिन मिले मजबूत सब्सक्रिप्शन और ग्रे मार्केट प्रीमियम ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। लेकिन बाजार में उत्साह के बीच निवेश से पहले कंपनी के कारोबार, संभावित जोखिमों और अपनी वित्तीय स्थिति को समझना जरूरी है। केवल आईपीओ के तेजी से सब्सक्राइब होने या जीएमपी के आधार पर मुनाफे की गारंटी नहीं मानी जा सकती।


