अमेरिका के फ्लोरिडा में हुए भीषण विमान हादसे ने एक बार फिर हवाई सफर की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आसमान में उड़ान भर रहा एक निजी विमान कुछ ही पलों में हादसे का शिकार हो गया। जिस विमान में सवार होकर यात्री अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे, उसी सफर का अंत एक दर्दनाक दुर्घटना में हुआ। अब इस हादसे से जुड़ी शुरुआती तकनीकी जानकारियां सामने आ रही हैं, जिनमें खराब मौसम, तूफानी बादल, तेज हवाओं और विमान पर जमती बर्फ की भूमिका की आशंका जताई जा रही है।
फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच के पास रविवार, 1 नवंबर को ‘लियरजेट 60’ (Learjet 60) निजी बिजनेस जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। अमेरिका की जांच एजेंसी नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) इस हादसे की जांच कर रही है। शुरुआती उड़ान रिकॉर्ड और रडार से मिले संकेतों के आधार पर माना जा रहा है कि विमान को आसमान में अचानक बेहद खराब मौसम का सामना करना पड़ा था।
20 सेकंड में बदल गया पूरा घटनाक्रम
उड़ान के दौरान पायलटों ने मौसम में बदलाव को भांपते हुए अपना रास्ता बदलने की कोशिश की थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोपहर 12:37 बजे पायलटों ने खराब मौसम से बचने के लिए बाईं ओर मुड़ने की अनुमति मांगी थी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने इसकी मंजूरी भी दे दी थी।
इसके करीब 10 मिनट बाद, दोपहर 12:47 बजे, दूसरे पायलट ने एटीसी को बताया कि विमान पर हल्की पारदर्शी बर्फ जम रही है। साथ ही हवा के मध्यम झटके महसूस हो रहे थे। उस समय विमान तेजी से विकसित होणाऱ्या वादळी ढगांच्या प्रभावक्षेत्रात पोहोचत असल्याची शक्यता होती. दोपहर 12:48 बजे मौसम और अधिक खराब होने के कारण पायलट ने विमान को 35 हजार फीट से 37 हजार फीट की ऊंचाई पर ले जाने की अनुमति मांगी। लेकिन इस अनुरोध के महज 20 सेकंड के भीतर विमान से आखिरी आपातकालीन संदेश यानी ‘Mayday Call’ आया। इसके बाद विमान का संपर्क टूट गया और वह जमीन पर जा गिरा।
क्या बर्फ की परत ने छीन लिया विमान का नियंत्रण?
इस हादसे में सबसे ज्यादा चर्चा विमान पर जम रही बर्फ और मौसम के अचानक बिगड़ने की हो रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, विमान के आसपास का तापमान बेहद कम था। ऐसे में तूफानी बादलों के भीतर मौजूद नमी और अत्यधिक ठंडी परिस्थितियां विमान के पंखों पर बर्फ जमने की वजह बन सकती थीं।
अगर विमान के पंखों पर तेजी से बर्फ जमती है, तो उसके वायुगतिकीय संतुलन पर असर पड़ सकता है। इससे विमान की लिफ्ट कम हो सकती है और पायलटों के लिए उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इस हादसे में वास्तव में ऐसा ही हुआ था या नहीं, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
क्या हवा के दबाव से टूट गया था विमान का पिछला हिस्सा?
हादसे से जुड़े कुछ सोशल मीडिया वीडियो में विमान का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। खास तौर पर विमान के हॉरिजॉन्टल स्टैबिलाइजर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह हिस्सा विमान को उड़ान के दौरान संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि विमान का यह हिस्सा हवा में ही अलग हुआ था या जमीन पर गिरने के दौरान क्षतिग्रस्त हुआ। फिलहाल सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
ब्लैक बॉक्स से खुलेगा हादसे का राज
इस दुर्घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि आसमान में मौसम कितनी तेजी से बदल सकता है और कुछ ही सेकंड में हालात कितने गंभीर हो सकते हैं। पायलटों ने खराब मौसम को देखते हुए रास्ता बदलने और ऊंचाई बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन विमान से संपर्क टूटने के बाद क्या हुआ, इसका पूरा घटनाक्रम अभी स्पष्ट नहीं है।
अब जांच एजेंसियों की नजर विमान के ब्लैक बॉक्स, फ्लाइट डेटा और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग पर है। इन्हीं से पता चल सकेगा कि आखिरी 20 सेकंड में विमान के भीतर क्या हुआ और इस दर्दनाक हादसे की असली वजह क्या थी।


