मुंबई : अमेजन रिटेल इंडिया के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) को एक बार फिर कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि नियमों का पालन करवाना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई करते समय उचित प्रक्रिया का पालन भी उतना ही जरूरी है। बिना पर्याप्त प्रक्रिया के सीधे लाइसेंस रद्द करना जरूरत से ज्यादा सख्त कदम है।
शुक्रवार (7 अगस्त) को प्रभारी मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान FDA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अपनी नीतियों को आक्रामक तरीके से लागू करने के चक्कर में सीधे लाइसेंस रद्द करना ऐसा है, जैसे मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल करना।
क्या है पूरा मामला?
मामला भिवंडी स्थित अमेजन के एक गोदाम से जुड़ा है। आरोप है कि मियाद खत्म हो चुके खाद्य पदार्थों को नष्ट करने के बजाय उन्हें खुदरा बाजार में भेजा गया। इसी मामले में FDA ने गोदाम के खिलाफ कार्रवाई की थी। अमेजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने अदालत को बताया कि FDA के अधिकारियों ने 24 जून को गोदाम का निरीक्षण किया था। कंपनी का दावा है कि इस दौरान उसे कोई ‘सुधार नोटिस’ नहीं दिया गया और अगले ही दिन लाइसेंस निलंबित कर दिया गया।
अपील लंबित, फिर लाइसेंस रद्द क्यों?
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब अपील पहले से लंबित थी, तो लाइसेंस रद्द करने का आदेश कैसे जारी किया गया। अदालत ने कहा कि अपील की अवधि के दौरान इस तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकती और संबंधित प्राधिकरण को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए। कोर्ट ने FDA को इस कार्रवाई के पीछे की वजह स्पष्ट करने का भी निर्देश दिया है।
FDA को कोर्ट की दो टूक
अदालत ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए FDA की सराहना भी की। हालांकि, कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या ऐसी स्थिति में FDA हर व्यावसायिक प्रतिष्ठान को बंद कर देगा? कोर्ट ने FDA को सलाह दी कि नियमों को लागू करते समय सख्ती के साथ-साथ संतुलन और उचित प्रक्रिया का भी ध्यान रखा जाए। FDA की ओर से सरकारी वकील नेहा भिडे ने अदालत को बताया कि मामले में FDA की ओर से जवाब दाखिल किया जाएगा। अब इस मामले में FDA की सफाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।


