महामार्गों पर सफर करने वाले दिव्यांग नागरिकों के लिए सरकार ने FASTag नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब टोल-मुक्त FASTag का हर साल नवीनीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। नई व्यवस्था के तहत FASTag की वैधता दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर तय की जाएगी, जिससे हजारों लाभार्थियों को राहत मिलने वाली है।
सरकार के नए नियम 2 अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं। इसके अनुसार, जिन लोगों की दिव्यांगता 70 प्रतिशत से 100 प्रतिशत के बीच है, उनके टोल-मुक्त FASTag की वैधता 5 साल तक होगी। वहीं, 40 प्रतिशत या उससे अधिक लेकिन 70 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले लाभार्थियों के FASTag 3 साल तक मान्य रहेंगे। इस सुविधा का लाभ केवल पात्र वाहनों को मिलेगा। इनमें दिव्यांग व्यक्तियों के उपयोग के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए वाहन और ‘दिव्यांगजन’ श्रेणी में पंजीकृत वाहन शामिल हैं। FASTag की वैधता दिव्यांगता प्रमाणपत्र, यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड और अन्य मान्य दस्तावेजों के आधार पर तय की जाएगी।
पहले लाभार्थियों को हर वर्ष दस्तावेज जमा कर FASTag का नवीनीकरण कराना पड़ता था, जिससे कई लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। खासकर दिव्यांग व्यक्तियों के लिए यह प्रक्रिया समय लेने वाली और कठिन साबित होती थी। नए नियमों से अब बार-बार कागजी प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता कम होगी और यात्रा अधिक आसान बनेगी। हालांकि, 3 या 5 साल की अवधि पूरी होने के बाद FASTag का नवीनीकरण कराना आवश्यक होगा। इसके लिए पात्रता, दिव्यांगता से जुड़े दस्तावेज और राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 के तहत निर्धारित शर्तों की जांच की जाएगी। सरकार के इस फैसले को दिव्यांग नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे उनकी यात्रा अधिक सुगम और सुविधाजनक बन सकेगी।


