एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाज ईशा सिंह ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित किया। महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में ईशा ने रजत पदक अपने नाम किया। खास बात यह रही कि फाइनल में ईशा और चीन की शाओ जियारुइक्सियन दोनों के 38-38 अंक थे। इसके बावजूद भारतीय निशानेबाज को सिल्वर से संतोष करना पड़ा। आखिर ऐसा क्यों हुआ?
दरअसल, दोनों खिलाड़ियों के अंक बराबर होने के बाद मुकाबला शूट-ऑफ में पहुंच गया। यहां हर निशानेबाज को पांच-पांच लक्ष्यों पर निशाना लगाना था। ईशा और शाओ के बीच मुकाबला इतना कड़ा रहा कि कई शूट-ऑफ राउंड तक दोनों के बीच गोल्ड के लिए संघर्ष चलता रहा। निर्णायक शूट-ऑफ में ईशा ने पांच में से तीन निशाने चूकाए, जबकि शाओ ने सिर्फ दो निशाने गंवाए। इसी अंतर ने चीन की खिलाड़ी को बढ़त दिला दी और ईशा को रजत पदक मिला। ईशा के लिए यह सफर आसान नहीं था। उन्हें पहले दूसरे स्थान के लिए और फिर स्वर्ण पदक के लिए शूट-ऑफ में मुकाबला करना पड़ा। आखिरकार 21 वर्षीय ईशा ने रजत पदक जीतकर भारत के पदक अभियान में एक और उपलब्धि जोड़ दी।
इस स्पर्धा के सांघिक मुकाबले में भारत 1727 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहा। चीन ने 1743 अंक लेकर स्वर्ण, दक्षिण कोरिया ने 1735 अंक के साथ रजत और चीनी ताइपे ने 1734 अंक के साथ कांस्य पदक जीता। ईशा का रजत पदक एशियन गेम्स 2026 में शूटिंग में भारत का 12वां पदक रहा। इनमें 1 स्वर्ण, 7 रजत और 4 कांस्य पदक शामिल हैं। वहीं, कुराश में पिंकी बलहारा को महिलाओं के 78 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में दक्षिण कोरिया की मो सुमिन के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा और उन्हें कांस्य पदक मिला। बॉक्सिंग में लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलोग्राम वर्ग में दक्षिण कोरिया की सेओग सूयोन को हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई और भारत के लिए एक पदक पक्का किया। ईशा गोल्ड से भले ही चूक गईं, लेकिन 38 अंकों तक पहुंचकर और शूट-ऑफ में लंबी लड़ाई लड़कर उन्होंने यह दिखा दिया कि भारतीय निशानेबाजी का भविष्य मजबूत हाथों में है।


