नई दिल्ली : 8वें वेतन आयोग को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। इसी बीच नेशनल काउंसिल–जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने आयोग के समक्ष कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे हैं। इनमें न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़ाने से लेकर सालाना वेतन वृद्धि (इन्क्रिमेंट), पे-स्केल और पेंशन व्यवस्था में बदलाव जैसी मांगें शामिल हैं।
NC-JCM ने मांग की है कि केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 69,000 रुपये तय की जाए। इसके साथ ही वर्तमान में मिलने वाली 3 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया जाए, ताकि कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई के बीच बेहतर आर्थिक राहत मिल सके। संघ का कहना है कि कई पे-लेवल में कर्मचारियों के काम और वेतन में बहुत कम अंतर है। ऐसे में अलग-अलग स्तर बनाए रखने के बजाय पे-स्केल का मर्जर (विलय) किया जाए, जिससे वेतन संरचना अधिक सरल और व्यावहारिक बन सके।
इसके अलावा लेवल-5 में कार्यरत कर्मचारियों को एकमुश्त लेवल-6 में अपग्रेड करने की भी मांग रखी गई है। NC-JCM का दावा है कि रेलवे, डाक विभाग, रक्षा और केंद्रीय सचिवालय के कई कर्मचारी लंबे समय से एक ही स्तर पर कार्य कर रहे हैं, इसलिए उन्हें पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए। संघ ने आयोग के समक्ष महंगाई से जुड़ा वेतन मॉडल, एक समान पे-मैट्रिक्स और पेंशन व्यवस्था में व्यापक सुधार की भी मांग की है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल ये केवल कर्मचारी संगठन की मांगें हैं। 8वें वेतन आयोग ने अभी तक इन प्रस्तावों पर कोई अंतिम फैसला या आधिकारिक घोषणा नहीं की है। आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार के निर्णय के बाद ही इन मांगों पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।


