नांदेड : करीब छह महीने बाद होने जा रही जिला नियोजन समिति की बैठक से पहले नांदेड कलेक्टरेट में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है। पालकमंत्री अतुल सावे के विशेष कार्य अधिकारी (OSD) मुकेश बारहाते पिछले पांच दिनों से जिला नियोजन अधिकारी सुधाकर चिंचाने के कक्ष में बैठकर बैठक की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। वहीं, जिला नियोजन अधिकारी को अपने ही कक्ष के बाहर बैठकर काम करना पड़ रहा है।
जिला नियोजन समिति की बैठक शुक्रवार, 17 जुलाई को आयोजित हो रही है। इससे पहले विधान परिषद चुनाव और राज्य सरकार के मानसून सत्र के कारण यह बैठक लगातार टलती रही थी। बैठक के आयोजन की जिम्मेदारी सामान्यतः जिला नियोजन अधिकारी की होती है, लेकिन इस बार OSD की सक्रियता ने प्रशासनिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कलेक्टरेट परिसर में चर्चा है कि OSD बारहाते ने बैठक की तैयारियों को लेकर सीधे जिला नियोजन अधिकारी के कक्ष से कामकाज संभाल लिया है। इससे यह संदेश जा रहा है कि वास्तविक नियंत्रण अब OSD के हाथ में है, जबकि संबंधित अधिकारी बाहर बैठकर फाइलें निपटा रहे हैं। कई कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच यह विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, जिला नियोजन अधिकारी सुधाकर चिंचाने असहज स्थिति में होने के बावजूद कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। प्रशासनिक हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें “तोंड दाबून बुक्क्यांचा मार” जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। जिला नियोजन समिति की बैठक विकास योजनाओं और निधि आवंटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में बैठक से पहले सामने आई यह व्यवस्था अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और अधिकारिक संतुलन की बहस का विषय बन गई है।


