नाशिक : नाशिक के चर्चित कथित धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार पूर्व TCS कर्मचारी निदा खान को स्थानीय अदालत से जमानत मिल गई है। जमानत देते समय अदालत ने कहा कि किसी भी महिला को जेल में बच्चे को जन्म देने की पीड़ा नहीं झेलनी चाहिए। न्यायालय ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह उन्हें कारागार में जन्म लेना पड़ा था, वैसी परिस्थिति किसी भी नवजात को नहीं झेलनी चाहिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि गर्भवती महिला को जेल में रखकर वहीं प्रसव होने की स्थिति बेहद संवेदनशील है। ऐसे मामलों में नवजात शिशु के हित, उसके बेहतर भविष्य और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किया जाना आवश्यक है। जानकारी के अनुसार, निदा खान फिलहाल पांच महीने की गर्भवती हैं। उन्हें 7 मई को छत्रपति संभाजीनगर स्थित एक किराए के मकान से गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले वह करीब 25 दिनों तक फरार थीं। अदालत ने यह भी माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। ऐसे में आगे हिरासत में रखने का कोई विशेष औचित्य नहीं है।
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए दावा किया कि जांच में धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने और अन्य गंभीर आरोपों से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। वहीं बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि निदा खान निर्दोष हैं और उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि वह उच्च शिक्षित हैं और नौकरी से हटाए जाने से पहले TCS में एसोसिएट के पद पर कार्यरत थीं। अदालत ने निदा खान को 75 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक सक्षम जमानतदार की शर्त पर जमानत मंजूर की है। गौरतलब है कि TCS की नाशिक यूनिट से जुड़े कथित धर्मांतरण, महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न, धार्मिक भावनाएं आहत करने, मानसिक प्रताड़ना और अन्य आरोपों से जुड़े कुल नौ मामलों की जांच जारी है।
पुलिस के आरोपों के अनुसार, निदा खान पर पीड़िता को धार्मिक सामग्री उपलब्ध कराने, इस्लाम से जुड़े मोबाइल ऐप इंस्टॉल करवाने और धार्मिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करने सहित कई आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, मामले की सुनवाई अभी न्यायालय में जारी है और इन आरोपों पर अंतिम निर्णय आना बाकी है।


