महाराष्ट्र में दिवाली से पहले बिजली व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। राज्य के थर्मल पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक लगातार घट रहा है। हालात यह हैं कि नागपुर के कोराडी बिजली केंद्र में सिर्फ डेढ़ दिन का कोयला बचा है, जबकि नासिक और चंद्रपुर के बिजली केंद्रों में महज तीन दिन का स्टॉक शेष है। राज्य के सभी बिजली केंद्रों को मिलाकर केवल 5.5 लाख मीट्रिक टन कोयला उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में त्योहार के समय बिजली की मांग बढ़ने पर आपूर्ति व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
महाजेनको के सूत्रों के अनुसार, कोयले की कमी की समस्या पिछले कई महीनों से बनी हुई है। चिंता की बात यह है कि पहले भी इस स्थिति को सुधारने का दावा किया गया था, लेकिन अब एक बार फिर बिजली केंद्रों में कोयले का भंडार निचले स्तर पर पहुंच गया है।दरअसल, अक्टूबर में गर्मी के कारण बिजली की मांग में बढ़ोतरी हुई थी। उस समय कोयले की कमी और बढ़ती मांग के बीच तालमेल बैठाना महाजेनको के लिए चुनौती बन गया था। हालांकि, मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना और सौर ऊर्जा परियोजनाओं की मदद से बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई।
उस समय महाजेनको के बिजली केंद्रों में 6 से 15 दिनों तक का कोयला उपलब्ध था। कंपनी की ओर से उम्मीद जताई गई थी कि आने वाले समय में स्थिति बेहतर होगी। लेकिन मौजूदा आंकड़े कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहे हैं।
कोयला कंपनियों और रेलवे से साधा जा रहा संपर्क
महाजेनको के निदेशक (ईंधन) विजय राठोड ने भी थर्मल पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक चिंताजनक स्तर पर पहुंचने की बात स्वीकार की है। उनके अनुसार, कोयला खदानों के क्षेत्रों में हुई बारिश के कारण कोयले की उपलब्धता प्रभावित हुई है। फिलहाल कोयला कंपनियों और रेलवे के साथ समन्वय बनाकर बिजली केंद्रों में कोयले का स्टॉक बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
महाजेनको का दावा, बिजली उत्पादन प्रभावित नहीं होगा
एक तरफ बिजली केंद्रों में कोयले का भंडार तेजी से कम हो रहा है, तो दूसरी तरफ महाजेनको प्रबंधन का दावा है कि कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, दिवाली से ठीक पहले सामने आए ये आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर समय रहते कोयले की आपूर्ति नहीं बढ़ी, तो आने वाले दिनों में बिजली उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था को किस तरह संभाला जाएगा। त्योहार के दौरान घरों, बाजारों और उद्योगों में बिजली की जरूरत बढ़ने के बीच महाजेनको के सामने इस स्थिति से निपटना बड़ी चुनौती होगी।


