देश में पहली बार बैटरी से 1000 मेगावाट आवर बिजली सप्लाई! महावितरण ने बनाया रिकॉर्ड

दिन में जमा होगी सौर ऊर्जा, शाम को आएगी काम; बढ़ती बिजली मांग के बीच उपभोक्ताओं को बड़ी राहत

महाराष्ट्र ने ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दिन में बनने वाली अतिरिक्त सौर ऊर्जा को बैटरी में स्टोर करके शाम के समय बिजली आपूर्ति के लिए इस्तेमाल करने की महावितरण की योजना सफल रही है। इस पहल के तहत महावितरण ने 1000 मेगावाट आवर बिजली आपूर्ति का आंकड़ा पार कर लिया है। खास बात यह है कि विकेंद्रित व्यवस्था के तहत बैटरी का इस्तेमाल करके इतनी बड़ी मात्रा में बिजली उपलब्ध कराने वाली महावितरण देश की पहली बिजली वितरण कंपनी बन गई है।

क्या है इस योजना की खासियत?

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 चलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों के कृषि पंपों को दिन के समय सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत अब तक करीब 7 हजार मेगावाट क्षमता के विकेंद्रित सौर ऊर्जा प्रकल्प शुरू हो चुके हैं।

इन प्रकल्पों से बनने वाली अतिरिक्त बिजली और ग्रिड के माध्यम से मिलने वाली सस्ती सौर ऊर्जा को बैटरी में स्टोर किया जाता है। इसके बाद शाम के समय जब बिजली की मांग बढ़ती है, तब इसी जमा बिजली का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए महावितरण ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) योजना शुरू की है। इसके तहत 500 मेगावाट क्षमता की बैटरी स्टोरेज व्यवस्था शुरू हो चुकी है। इससे दो घंटे तक बिजली आपूर्ति की जा सकती है और कुल 1000 मेगावाट आवर ऊर्जा उपलब्ध हो रही है।

बढ़ती गर्मी और बिजली की मांग के बीच राहत

इस साल अल नीनो के प्रभाव से बारिश कम हुई है। इसका असर अक्टूबर महीने में भी देखने को मिल रहा है। तापमान बढ़ने के कारण बिजली की मांग में भी इजाफा हुआ है। दिन के समय सौर ऊर्जा से कम कीमत पर बिजली उपलब्ध हो जाती है, लेकिन शाम होते ही सौर ऊर्जा का उत्पादन बंद हो जाता है। ऐसे में बिजली की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए महंगे दामों पर बिजली खरीदनी पड़ती है।

इस चुनौती के बीच बैटरी स्टोरेज प्रकल्प महावितरण के लिए मददगार साबित हो रहे हैं। दिन में जमा की गई बिजली शाम को इस्तेमाल की जा सकती है। इससे बाजार से महंगी बिजली खरीदने की जरूरत कम होगी। इसका फायदा केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि राज्य के सभी बिजली उपभोक्ताओं को मिल सकता है।

दिसंबर तक बढ़ेगी बिजली स्टोरेज क्षमता

महावितरण ने कुल 750 मेगावाट क्षमता के बैटरी स्टोरेज प्रकल्प स्थापित करने की योजना बनाई है। इससे दो घंटे के लिए कुल 1500 मेगावाट आवर बिजली उपलब्ध हो सकेगी। इसमें से 1000 मेगावाट आवर क्षमता का काम पूरा हो चुका है, जबकि बाकी काम दिसंबर 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

इसके अलावा 4000 मेगावाट आवर क्षमता के अन्य बैटरी स्टोरेज प्रकल्पों पर भी काम चल रहा है। आगामी गर्मियों में जब बिजली की मांग बढ़ेगी, तब इन परियोजनाओं से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

राज्य के 50 स्थानों पर शुरू हुए प्रकल्प

महावितरण ने महाराष्ट्र में 50 अलग-अलग स्थानों पर 10-10 मेगावाट क्षमता के बैटरी स्टोरेज प्रकल्प शुरू किए हैं। इन परियोजनाओं को बिजली वितरण नेटवर्क से जोड़ा गया है। इससे सौर ऊर्जा को स्टोर करके जरूरत के समय इस्तेमाल करना संभव हुआ है। मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव और महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र ने इस उपलब्धि की जानकारी दी। उनके मुताबिक, राज्य में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को देखते हुए बैटरी स्टोरेज व्यवस्था आने वाले समय में काफी महत्वपूर्ण साबित होगी। कुल मिलाकर, महाराष्ट्र में सौर ऊर्जा को केवल दिन के समय इस्तेमाल करने तक सीमित न रखते हुए उसे जरूरत के समय उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। इससे बिजली आपूर्ति मजबूत होने के साथ ही स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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