नई दिल्ली : आतंकवाद के कारण दुनिया के कई हिस्सों में शांति और सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। ऐसे में भारत ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ अपना सख्त रुख स्पष्ट किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को कहा कि किसी देश की नीतियों को आगे बढ़ाने और उन्हें लागू करने के लिए आतंकवाद का इस्तेमाल करना पूरी तरह अस्वीकार्य है। आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता।
चिन्मय मिशन के 75वें वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जयशंकर ने वैश्विक शांति और आतंकवाद के खतरे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी देश आतंकवाद के प्रति वास्तविक रूप से जीरो टॉलरेंस की नीति नहीं अपनाते। यही वजह है कि आज भी विश्व के कई हिस्सों में आतंकवाद का खतरा बना हुआ है।
‘कहीं भी युद्ध हो, शांति के लिए खतरा’
जयशंकर ने कहा कि शांति को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर नहीं देखा जा सकता। दुनिया के किसी भी हिस्से में होने वाला युद्ध वैश्विक शांति के लिए खतरा है। यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में संवाद और कूटनीति ही समाधान का रास्ता हो सकते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के साझा खतरे को गंभीरता से समझने और इसके सभी रूपों के खिलाफ एकजुट होकर कार्रवाई करने की अपील की।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता जरूरी
जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। उन्होंने किसी देश का सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन आतंकवाद को नीतिगत साधन के रूप में इस्तेमाल करने की सोच पर कड़ा संदेश दिया। उनकी बात का स्पष्ट संकेत है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है। जब तक सभी देश इसके खिलाफ समान रूप से सख्त रुख नहीं अपनाएंगे, तब तक वैश्विक शांति और सुरक्षा की चुनौती बनी रहेगी।


