एक छोटे से गाँव में मीरा नाम की एक बच्ची रहती थी। उसे पेड़-पौधों और जानवरों से बहुत प्यार था। हर सुबह वह अपने घर की खिड़की पर बैठकर चिड़ियों को दाना खिलाती थी।
एक दिन मीरा ने देखा कि एक छोटी-सी चिड़िया बार-बार उड़ने की कोशिश कर रही थी, लेकिन कुछ दूर जाते ही जमीन पर गिर जाती थी। मीरा ने उसे प्यार से उठाया और एक टोकरी में मुलायम कपड़ा बिछाकर बैठा दिया।
कुछ दिनों तक मीरा उसकी देखभाल करती रही। धीरे-धीरे चिड़िया ठीक होने लगी। अब वह अपने पंख फड़फड़ाती और खिड़की से बाहर देखने लगी।
एक सुबह मीरा ने खिड़की खोल दी। चिड़िया उड़कर पेड़ की सबसे ऊँची डाल पर जा बैठी। मीरा उसे देखकर खुश तो हुई, लेकिन उसकी आँखों में आँसू भी आ गए।
उसे लगा कि अब उसकी छोटी दोस्त वापस नहीं आएगी।
अगली सुबह मीरा खिड़की पर आई, तो उसने देखा कि वही चिड़िया अपने साथ दो और चिड़ियों को लेकर आई थी। तीनों खिड़की पर बैठकर चहचहाने लगीं।
मीरा खुशी से हँस पड़ी। उसने उनके लिए दाना रखा और मन ही मन सोचा, “मैंने तो इसे सिर्फ उड़ना सिखाया था, लेकिन इसने मुझे खुशियाँ बाँटना सिखा दिया।”
उस दिन के बाद मीरा रोज चिड़ियों के लिए दाना-पानी रखने लगी। धीरे-धीरे उसके घर की खिड़की चिड़ियों का पसंदीदा ठिकाना बन गई।
✨ कहानी से सीख
सच्चा प्यार किसी को बाँधकर रखने में नहीं, बल्कि उसे अपने पंख फैलाकर उड़ने का मौका देने में है।


