नागपुर : खेती में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम है, लेकिन कई बार आधिकारिक पहचान और सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव में उन्हें जरूरी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। अब महिला किसान प्रमाणपत्र के माध्यम से उनकी पहचान को मजबूती मिलेगी और वे विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उठा सकेंगी। यह बात वनामती की संचालक आशा पठाण ने कही।
अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026 और महिला किसान दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र शासन के कृषि विभाग और कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी (आत्मा), नागपुर की ओर से वनामती में क्षेत्रीय कार्यशाला और कृषि प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन वनामती की संचालक आशा पठाण ने किया। इस दौरान महिला किसानों के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के साथ कृषि क्षेत्र में उनकी भागीदारी को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
महिला किसानों को मिलेगी नई पहचान
कार्यशाला को संबोधित करते हुए आशा पठाण ने कहा कि महिला किसान प्रमाणपत्र महिलाओं को खेती के क्षेत्र में आधिकारिक पहचान दिलाने में मदद करेगा। इससे उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। साथ ही कृषि उत्पादन बढ़ाने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
खेती के साथ आय बढ़ाने के बताए तरीके
विभागीय कृषि सहसंचालक उमेश घाडगे ने महिला किसानों को कुक्कुटपालन, रेशम उद्योग और कृषि प्रसंस्करण जैसे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आय के स्रोत बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि खेती के साथ अन्य कृषि आधारित गतिविधियों को अपनाकर महिलाएं आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
पोषण विशेषज्ञ डॉ. रेणुका मायंदे ने महिलाओं के स्वास्थ्य, एनीमिया की रोकथाम और स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उपयोग की जानकारी दी। वहीं, कृषि वैज्ञानिक डॉ. सरिता मोवाडे ने मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए जैविक कार्बन बढ़ाने, जैविक कृषि इनपुट के इस्तेमाल और फसल चक्र अपनाने के महत्व को समझाया।
महिला किसानों के उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए आत्मा की परियोजना संचालक तथा जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी डॉ. अर्चना कडू ने बताया कि महिला किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने के साथ उनके उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और सीधे बाजार तक पहुंच बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। प्रगतिशील महिला किसान सुनीता वाधवा ने प्राकृतिक खेती और कृषि प्रसंस्करण उद्योग से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नए अवसरों और संभावनाओं को सामने रखा।
प्रगतिशील महिला किसानों का सम्मान
कार्यशाला में नागपुर विभाग के सभी जिलों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रगतिशील महिला किसानों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से तैयार जैविक उत्पादों, हस्तशिल्प वस्तुओं और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के स्टॉल भी लगाए गए। इन स्टॉलों के माध्यम से महिलाओं के कौशल और उनके उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में विभागीय कृषि सहसंचालक उमेश घाडगे, आत्मा की परियोजना संचालक डॉ. अर्चना कडू, परियोजना उपसंचालक पल्लवी तलमले, डॉ. रेणुका मायंदे, डॉ. सरिता मोवाडे, सुनीता वाधवा सहित कृषि विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में महिला किसान उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन तकनीकी अधिकारी शुभांगी कामडी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन वैशाली पाटील ने किया।


